Iran-Israel War: क्या खाली हो जाएंगे पेट्रोल पंप? ईरान-इजरायल जंग के बीच अमिताभ कांत की बड़ी चेतावनी

Iran-Israel war: ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। पूर्व जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने चेतावनी दी है कि हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी भारत के आयात बिल को 13-14 अरब डॉलर तक बढ़ा सकती है।

Priya Shandilya
अपडेटेड5 Mar 2026, 04:19 PM IST
ईरान-इजरायल जंग के कारण बढ़ेगी कच्चे तेल की कीमत, क्या भारत के पास है कोई 'बैकअप' प्लान? (सांकेतिक तस्वीर)
ईरान-इजरायल जंग के कारण बढ़ेगी कच्चे तेल की कीमत, क्या भारत के पास है कोई 'बैकअप' प्लान? (सांकेतिक तस्वीर)

Iran-Israel war: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर संकट गहराता जा रहा है। इस अहम समुद्री मार्ग में बाधा की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है।

भारत के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसी बीच नीति आयोग के पूर्व सीईओ और भारत के पूर्व जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने एक अहम चेतावनी दी है।

एक झटके में 14 अरब डॉलर का बोझ: अमिताभ कांत ने चेताया

अमिताभ कांत ने सोशल मीडिया (X) पर एक डराने वाला आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में सिर्फ 10 डॉलर प्रति बैरल का भी इजाफा होता है, तो भारत का सालाना तेल आयात बिल 13 से 14 अरब डॉलर (करीब 1.15 लाख करोड़) तक बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, यह न केवल हमारे व्यापार घाटे को बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय रुपये पर भी भारी दबाव डालेगा। साफ है कि विदेशी युद्ध के हालात हमारी 'एनर्जी सिक्योरिटी' की कड़ी परीक्षा ले रहे हैं।

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ईरान संघर्ष से तेल बाजार में उछाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में तेजी देखी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 83.99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड करीब 77.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबा खिंचता है तो तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जिससे कीमतों में और उछाल आ सकता है।

भारत में भी कच्चा तेल महंगा

वैश्विक कीमतों के असर से भारत में भी कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में अप्रैल डिलीवरी वाले क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 185 बढ़कर 7,055 प्रति बैरल तक पहुंच गई। विश्लेषकों के मुताबिक मजबूत मांग और वैश्विक बाजार के संकेतों की वजह से फ्यूचर्स मार्केट में भी तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। निवेशक इस डर में हैं कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।

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क्या भारत के पास है पर्याप्त तेल?

अब सवाल उठता है कि अगर सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई तो क्या होगा? सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास फिलहाल पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की मांग पूरी करने के लिए 6 से 8 हफ्ते तक का भंडार मौजूद है। इसके अलावा देश के पास करीब 25 दिन का कच्चा तेल स्टॉक भी उपलब्ध है। अगर संकट लंबा चलता है तो सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों का इस्तेमाल कर सकती है। इनमें अमेरिका, रूस, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे देशों से तेल आयात शामिल हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट का केंद्र

मिडिल ईस्ट के तेल कारोबार में होर्मुज जलडमरूमध्य की अहम भूमिका है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरानी बलों द्वारा इस इलाके में तेल टैंकरों पर हमले की खबरें सामने आई हैं। कुवैत के पास एक टैंकर के पास धमाकों की भी सूचना मिली है। ऐसी घटनाओं के बाद कई बीमा कंपनियों ने टैंकरों के लिए बीमा कवर हटाना शुरू कर दिया, जिससे तेल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

समाधान क्या हो सकता है?

अमिताभ कांत का मानना है कि केवल ग्रीन एनर्जी की 'क्षमता' बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि उसे घर-घर तक 'डिलीवर' करना होगा। उन्होंने सोलर-विंड हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV), बड़ी बैटरी और न्यूक्लियर पावर जैसे विकल्पों पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के दौर में ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। अगर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ज्यादा घरेलू और स्वच्छ स्रोतों पर निर्भर होता है, तो ऐसे वैश्विक संकटों का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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