
Iran Crypto Trade: ईरान के ऊपर इन दिनों चौतरफा मार पड़ रही है। अमेरिका और इजराइल (Iran-US War) के हमलों से इस पश्चिमी एशियाई देश में जान-माल की भारी हानि हुई है। लेकिन, युद्ध के बीच ईरान ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए क्रिप्टोकरेंसी को हथियार बनाया है। दरअसल, एनालिस्ट का कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने और विदेशी खरीद को जारी रखने के लिए तेजी से क्रिप्टोकरेंसी की ओर रुख कर रहा है। इससे पारंपरिक डॉलर-बेस्ड सिस्टम के बाहर एक वित्तीय चैनल का निर्माण हो रहा है।
बता दें कि ईरान की करेंसी में गिरावट का दौर जारी है। देश की इकोनॉमी में कडी पाबंदी लगाई गई है। अमेरिका और पश्चिमी देशों ने ईरान को वैश्विक बैंकिंग प्रणाली (SWIFT) से काटकर उसकी आर्थिक कमर तोड़ने की हर संभव कोशिश की है। उसकी तेल की बिक्री भी खूब प्रतिबंध लगाए गए।
इन प्रतिबंधों से भले ही ईरान की हालत काफी खस्ता हो गई है, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था अब भी उस हाल में नहीं पहुंची है, जिसका सपना अमेरिका देख रहा है। तेहरान (ईरान की राजधानी) अभी भी विदेशों में मशीनरी, फ्यूल और मिलिट्री पार्ट्स के लिए एक ऐसे फाइनेंशियल रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है जिसे डोनाल्ड ट्रंप भी कंट्रोल नहीं कर सकते है। इसकी वजह बिटकॉइन माइन है।
पिछले कुछ सालों में ईरान ने एक ऐसा ‘डिजिटल फाइनेंशियल चैनल तैयार कर लिया है, जहां डॉलर की पाबंदियां बेअसर साबित हो रही हैं। इस चैनल को बिटकॉइन से बुना गया है। आज ईरान बिटकॉइन माइनिंग करके मोटा मुनाफा कमा रहा है। ईरान ने साल 2019 में बिटकॉइन माइनिंग को लीगल किया है। आज ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को ढहने से बचाने के लिए बिटकॉइन और अन्य डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल एक रणनीतिक हथियार के रूप में कर रहा है। हवाई हमलों के बीच भी ईरान का पैसा रुक नहीं रहा है, बल्कि वह ब्लॉकचेन की गुमनाम गलियों से होकर दुनिया भर में आ जा रहा है।
बिटकॉइन माइनिंग वह प्रोसेस है जिसके द्वारा नए बिटकॉइन प्रचलन में आते हैं और बिटकॉइन ब्लॉकचेन पर ट्रांजेक्शन को सत्यापित और सुरक्षित किया जाता है। क्रिप्टो माइनिंग में माइनर्स को मुश्किल मैथेमैटिकल इक्वेशंस को हल करना होता है, जिससे ब्लॉकचेन में नए ब्लॉक जोड़े जा सकें। इस प्रोसेस में माइनर्स को अपने कंप्यूटर्स की शक्तिशाली प्रोसेसिंग कैपेसिटी का उपयोग करना होता है। जब कोई माइनर प्रॉब्लम सॉल्व करता है, तो उसे क्रिप्टोकरेंसी के रूप में रिवॉर्ड मिलता है।
माइनिंग से बनने वाला बिटकॉइन सीधे सरकार के नियंत्रण वाले डिजिटल वॉलेट में भेजा जा सकता है। इसके बाद उसी से अंतरराष्ट्रीय लेन-देन किया जाता है। इससे तेहरान विदेशों से मशीनरी, तेल-गैस और सैन्य उपकरण खरीद सकता है और उसे डॉलर आधारित बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। इस प्रक्रिया में कोई SWIFT ट्रांसफर नहीं है, कोई विदेशी बैंक मध्यस्थ का काम नहीं करता है और अमेरिकी ट्रेजरी का भी कोई नियंत्रण नहीं है।
NDTV में छपी खबर के मुताबिक, अमेरिका के बिटकॉइन रणनीतिकार जेक पर्सी का कहना है कि ईरान लगभग 1300 डॉलर की लागत में एक बिटकॉइन माइन कर सकता है। अभी बिटकॉइन की मार्केट वैल्यू करीब 73,000 डॉलर है। यानी हर सिक्के पर ईरान को लगभग 71,700 डॉलर का फायदा होता है। इस पैसे का इस्तेमाल वैश्विक बैंकिंग सिस्टम के बाहर किया जा सकता है।
इस रणनीति से ईरान पर लगाई गई पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की पूरी व्यवस्था में एक बड़ा लूपहोल तैयार हो गया है। इस व्यवस्था को अमेरिका ने लगभग दो दशकों में बनाया था। जानकारों का कहना है कि का कहना है कि ईरान ने बिटकॉइन के सहारे एक समानांतर वित्तीय चैनल खड़ा कर लिया है। यह चैनल पारंपरिक डॉलर आधारित प्रणाली से पूरी तरह बाहर है।
ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनी Chainalysis के अनुमान के मुताबिक 2025 तक ईरान का क्रिप्टो इकोसिस्टम लगभग 7.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार 2025 के अंत में ईरान में आने वाली क्रिप्टो फंडिंग का आधे से ज्यादा हिस्सा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े वॉलेट एड्रेस से जुड़ा हुआ था। अकेले एक साल में इन पतों के जरिए 3 अरब डॉलर से अधिक का लेनदेन हुआ।
यह अब केवल व्यक्तिगत निवेश का साधन नहीं, बल्कि राज्य द्वारा संचालित एक वित्तीय सुरक्षा कवच बन चुका है। ईरान के पास ऊर्जा के विशाल भंडार हैं, लेकिन प्रतिबंधों के कारण वह अपना तेल और गैस आसानी से नहीं बेच पाता। ऐसे में ईरान ने अपनी सस्ती बिजली का इस्तेमाल बिटकॉइन माइनिंग में करना शुरू कर दिया है। इसे ‘डिजिटल तेल’ कहना गलत नहीं होगा।
28 फरवरी, 2026 को जब अमेरिका और इजराइल ने तेहरान पर हवाई हमले किए, तब ब्लॉकचेन डेटा ने कुछ ऐसी गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जिसने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। हमलों के तुरंत बाद ईरान के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज ‘नोबिटेक्स’ (Nobitex) पर निकासी की सुनामी आ गई। 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच इस एक्सचेंज से करीब 10.3 मिलियन डॉलर निकाल लिए गए। चेनालिसिस के अनुसार, उस दौरान प्रति घंटे होने वाली निकासी सामान्य औसत से 873% अधिक थी।
बता दें कि ईरान ही अकेला देश नहीं है जो क्रिप्टो की इस कमजोरी का फायदा उठा रहा है। चेनालिसिस की 2026 क्रिप्टो क्राइम रिपोर्ट के अनुसार 2025 में अवैध क्रिप्टो खातों में कुल 154 अरब डॉलर आए। इसका बड़ा कारण प्रतिबंधित संस्थाओं को जाने वाले पैसों में 694 प्रतिशत की बढ़ोतरी थी। रूस ने एक प्रतिबंधित स्टेबलकॉइन के जरिए लगभग 93 अरब डॉलर का लेन-देन किया, जिससे डॉलर सिस्टम से बाहर पैसा भेजा जा सके। वहीं नॉर्थ कोरिया के हैकरों ने एक ही क्रिप्टो एक्सचेंज पर हमले में 1.5 अरब डॉलर चुरा लिए और इस पैसे को सीधे अपने हथियार कार्यक्रम में झोंक दिया।
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