Jaypee Infratech: नोएडा के विश टाउन में 17,000 होम बायर्स की उम्मीदें फिर हुईं ध्वस्त, नए सिरे से मुकदमेबाजी शुरू

Jaypee Infratech Suraksha Group FIR: नोएडा के विश टाउन में घर का इंतजार कर रहे 17,000 बायर्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ईडी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने जेपी इन्फ्राटेक का अधिग्रहण करने वाले सुरक्षा ग्रुप के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड16 Jan 2026, 04:23 PM IST
विश टाउन के 17 हजार होमबायर्स के लिए फिर मायूसी की खबर।
विश टाउन के 17 हजार होमबायर्स के लिए फिर मायूसी की खबर।(HT)

Wish Town Noida homebuyers newsजेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड (JIL) के प्रोजेक्ट्स में फंसे हजारों घर खरीदारों की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सुरक्षा रियल्टी और लक्षद्वीप इन्वेस्टमेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने फ्लैट्स को पूरा करने के लिए रखे गए पैसों का दूसरे कामों में इस्तेमाल किया है। विश टाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में फंसे 17,000 से ज्यादा परिवारों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है।

सुरक्षा ग्रुप पर धोखाधड़ी और साजिश का आरोप

दिल्ली पुलिस ने यह एफआईआर 1 जनवरी को दर्ज की है। इसमें सुरक्षा ग्रुप पर आईपीसी की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। ईडी पहले से ही जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। इसी मामले में नवंबर 2025 में जेपी के पुराने प्रमोटर मनोज गौड़ को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

खरीदारों के पैसे और टोल की कमाई का गलत इस्तेमाल

जांच में सामने आया है कि सुरक्षा ग्रुप ने जेपी इन्फ्राटेक की कमान संभालने के बाद नियमों का उल्लंघन किया। जेपी के सीएफओ राहुल गोहिल ने कहा कि कंपनी ने 125 करोड़ रुपये तो लगाए, लेकिन 3,000 करोड़ की क्रेडिट सुविधा जैसी जरूरी शर्तें पूरी नहीं कीं। आरोप है कि घर खरीदारों के पैसे से बनी एफडी (FD) और यमुना एक्सप्रेसवे के टोल से हुई कमाई को दूसरी कंपनियों में 'लोन' के तौर पर भेज दिया गया।जेपी इन्फ्राटेक की

दिवालिया प्रक्रिया: 2017 से 2026 तक की टाइमलाइन

जेपी इन्फ्राटेक का संकट भारत के रियल एस्टेट इतिहास के सबसे लंबे और पेचीदा कानूनी संघर्षों में से एक है।

सालघटनाक्रम और मुख्य पड़ाव
अगस्त 2017दिवालिया प्रक्रिया शुरू: IDBI बैंक की अगुवाई में कर्जदाताओं ने जेपी इन्फ्राटेक (JIL) के खिलाफ NCLT में अर्जी दी। 20,000 से ज्यादा खरीदार अधर में लटक गए।
2018 - 2021लंबी कानूनी लड़ाई: इस दौरान सुप्रीम कोर्ट और NCLT में कई दौर की सुनवाई हुई। खरीदारों को 'वित्तीय लेनदार' (Financial Creditors) का दर्जा दिया गया। NBCC और सुरक्षा ग्रुप के बीच कड़ी टक्कर चली।
जून 2021सुरक्षा ग्रुप की जीत: बैंकर्स और खरीदारों (CoC) ने सुरक्षा ग्रुप के प्लान को वोटिंग के जरिए मंजूरी दी। सुरक्षा ने सरकारी कंपनी NBCC को पछाड़ दिया।
मार्च 2023NCLT की अंतिम मुहर: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने सुरक्षा ग्रुप के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी। खरीदारों को उम्मीद जागी कि 4 साल में घर मिल जाएंगे।
मई 2024NCLAT का फैसला: अपीलीय न्यायाधिकरण ने सुरक्षा के प्लान को बरकरार रखा। जून 2024 में सुरक्षा ने औपचारिक रूप से जेपी इन्फ्राटेक का मैनेजमेंट अपने हाथ में लिया।
मई-जून 2025जांच और गिरफ्तारी: ईडी ने जेपी के पुराने प्रमोटर मनोज गौड़ को गिरफ्तार किया। इसी दौरान ईडी ने सुरक्षा ग्रुप के वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी पकड़ी और पुलिस को सूचना दी।
जनवरी 2026FIR और नया संकट: दिल्ली पुलिस ने फंड डायवर्जन के आरोप में सुरक्षा ग्रुप और सहयोगियों पर FIR दर्ज की। बायर्स एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गए।

इन कंपनियों में पैसा ट्रांसफर करने का है शक

एफआईआर के मुताबिक, फंड को लक्षद्वीप से जुड़ी कंपनियों में डायवर्ट किया गया। इसमें आईटीआई गोल्ड लोन्स को 75 करोड़, आईटीआई हाउसिंग फाइनेंस को 25 करोड़ और आईटीआई फाइनेंस को वाहन लोन के लिए 135 करोड़ रुपये दिए गए। इसके अलावा, आईटीआई म्यूचुअल फंड में भी 107 करोड़ रुपये निवेश किए गए। ये सभी कंपनियां सुरक्षा ग्रुप के प्रमोटर सुधीर वालिया के दामाद चिंतन विजय वालिया से जुड़ी बताई जा रही हैं।

10 साल से ज्यादा का इंतजार और अधूरी कंस्ट्रक्शन

विश टाउन प्रोजेक्ट साल 2010-11 में लॉन्च हुआ था और इसकी डिलीवरी 2014-15 में होनी थी। सुरक्षा ग्रुप ने 2024 में इस प्रोजेक्ट को हाथ में लिया और 4 साल में घर देने का वादा किया था। हालांकि, खरीदारों का कहना है कि निर्माण कार्य की रफ्तार बहुत धीमी है। सुरक्षा ग्रुप का दावा है कि उसने अधिग्रहण के बाद 63 टावरों में 5,989 फ्लैट्स का काम पूरा किया है, लेकिन 159 टावरों वाले इस प्रोजेक्ट में अभी भी हजारों लोग अपने घर की राह देख रहे हैं।

बायर्स एसोसिएशन ने की सख्त कार्रवाई की मांग

जेआईएल रियल एस्टेट अलॉटी वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष आशीष मोहन गुप्ता ने कहा कि ईडी की जांच ने उनके दावों को सही साबित किया है। उन्होंने अधिकारियों से मांग की है कि खरीदारों का पैसा जल्द से जल्द वसूल किया जाए। यह पैसा केवल घरों के निर्माण में ही लगना चाहिए ताकि लोगों को उनके आशियाने मिल सकें।

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