Wish Town Noida homebuyers newsजेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड (JIL) के प्रोजेक्ट्स में फंसे हजारों घर खरीदारों की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सुरक्षा रियल्टी और लक्षद्वीप इन्वेस्टमेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने फ्लैट्स को पूरा करने के लिए रखे गए पैसों का दूसरे कामों में इस्तेमाल किया है। विश टाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में फंसे 17,000 से ज्यादा परिवारों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है।
सुरक्षा ग्रुप पर धोखाधड़ी और साजिश का आरोप
दिल्ली पुलिस ने यह एफआईआर 1 जनवरी को दर्ज की है। इसमें सुरक्षा ग्रुप पर आईपीसी की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। ईडी पहले से ही जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। इसी मामले में नवंबर 2025 में जेपी के पुराने प्रमोटर मनोज गौड़ को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
खरीदारों के पैसे और टोल की कमाई का गलत इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि सुरक्षा ग्रुप ने जेपी इन्फ्राटेक की कमान संभालने के बाद नियमों का उल्लंघन किया। जेपी के सीएफओ राहुल गोहिल ने कहा कि कंपनी ने 125 करोड़ रुपये तो लगाए, लेकिन 3,000 करोड़ की क्रेडिट सुविधा जैसी जरूरी शर्तें पूरी नहीं कीं। आरोप है कि घर खरीदारों के पैसे से बनी एफडी (FD) और यमुना एक्सप्रेसवे के टोल से हुई कमाई को दूसरी कंपनियों में 'लोन' के तौर पर भेज दिया गया।जेपी इन्फ्राटेक की
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जेपी इन्फ्राटेक का संकट भारत के रियल एस्टेट इतिहास के सबसे लंबे और पेचीदा कानूनी संघर्षों में से एक है।
इन कंपनियों में पैसा ट्रांसफर करने का है शक
एफआईआर के मुताबिक, फंड को लक्षद्वीप से जुड़ी कंपनियों में डायवर्ट किया गया। इसमें आईटीआई गोल्ड लोन्स को 75 करोड़, आईटीआई हाउसिंग फाइनेंस को 25 करोड़ और आईटीआई फाइनेंस को वाहन लोन के लिए 135 करोड़ रुपये दिए गए। इसके अलावा, आईटीआई म्यूचुअल फंड में भी 107 करोड़ रुपये निवेश किए गए। ये सभी कंपनियां सुरक्षा ग्रुप के प्रमोटर सुधीर वालिया के दामाद चिंतन विजय वालिया से जुड़ी बताई जा रही हैं।
10 साल से ज्यादा का इंतजार और अधूरी कंस्ट्रक्शन
विश टाउन प्रोजेक्ट साल 2010-11 में लॉन्च हुआ था और इसकी डिलीवरी 2014-15 में होनी थी। सुरक्षा ग्रुप ने 2024 में इस प्रोजेक्ट को हाथ में लिया और 4 साल में घर देने का वादा किया था। हालांकि, खरीदारों का कहना है कि निर्माण कार्य की रफ्तार बहुत धीमी है। सुरक्षा ग्रुप का दावा है कि उसने अधिग्रहण के बाद 63 टावरों में 5,989 फ्लैट्स का काम पूरा किया है, लेकिन 159 टावरों वाले इस प्रोजेक्ट में अभी भी हजारों लोग अपने घर की राह देख रहे हैं।
बायर्स एसोसिएशन ने की सख्त कार्रवाई की मांग
जेआईएल रियल एस्टेट अलॉटी वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष आशीष मोहन गुप्ता ने कहा कि ईडी की जांच ने उनके दावों को सही साबित किया है। उन्होंने अधिकारियों से मांग की है कि खरीदारों का पैसा जल्द से जल्द वसूल किया जाए। यह पैसा केवल घरों के निर्माण में ही लगना चाहिए ताकि लोगों को उनके आशियाने मिल सकें।