
कर्नाटक में प्राइवेट जेट और हेलीकॉप्टरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह राज्य भारत में निजी विमानन (private aviation) के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक बन गया है। पिछले कुछ वर्षों में कर्नाटक न केवल एयरोस्पेस और रक्षा के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है बल्कि निजी विमानों के स्वामित्व (ownership of private aircraft) में भी वहां तेजी से वृद्धि हो रही है। राजनेता, कॉरपोरेट और व्यावसायिक दिग्गज राजनीतिक, व्यावसायिक और निजी यात्राओं के लिए अपने हेलीकॉप्टरों और जेट विमानों का उपयोग तेजी से बढ़ा रहे हैं।
जिन लोगों के पास अपना प्राइवेट जेट या हेलिकॉप्टर है, उनमें लोक निर्माण मंत्री सतीश जरकीहोली (Satish Jarkiholi) भी हैं। जरकीहोली उत्तर कर्नाटक में हेलीकॉप्टर के मालिक बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। वह लगभग 30 करोड़ रुपये का अगस्ता एडब्ल्यू109 (Agusta AW109) उड़ाते हैं।
वरिष्ठ राजनेता और शमनूर समूह के प्रमुख शमनूर शिवशंकरप्पा के पास एक यूरोकॉप्टर एएस 350 बी3 (Eurocopter AS 350 B3) है, जिसका उपयोग 2011 से लगातार राजनीतिक और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
वीआरएल समूह के विजय संकेश्वर ने हुबली, बेंगलुरु और मुंबई के बीच अपनी लगातार यात्राओं के लिए 100 करोड़ रुपये तक के मूल्य के बीचक्राफ्ट प्रीमियर 1ए जेट (Beechcraft Premier 1A Jet) में निवेश किया है। होस्पेट स्थित खनन कंपनी एमएलपीएल (MLPL) के पास कॉरपोरेट उपयोग के लिए पियाजियो अवंती पी180 जेट (Piaggio Avanti P180 jet) भी है।
कोलार स्थित टाटा-एयरबस हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई (Tata-Airbus Helicopters manufacturing unit) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन करते हुए 10 यूनिट्स की वार्षिक क्षमता वाले एच125 मॉडल हेलीकॉप्टरों का प्रॉडक्शन (production of model helicopters) शुरू कर दिया है।
यह भारत का पहला निजी हेलीकॉप्टर उत्पादन संयंत्र (Private helicopter production plant) है और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इससे निजी स्वामित्व में भारी वृद्धि होगी।
वर्तमान में कर्नाटक में अधिकांश हेलीकॉप्टर संचालन डेक्कन चार्टर्स (Deccan Charters), थुंबी एविएशन (Thumbi Aviation) और ब्लूहाइट्स एविएशन (Blue Heights Aviation) जैसी फर्मों द्वारा प्रदान की जाने वाली चार्टर सेवाओं (charter services) के माध्यम से संचालित होते हैं।
इस बीच राज्य सरकार वीआईपी यात्रा (VIP Travel) के लिए लगभग 1 लाख रुपये प्रति घंटे की दर से हेलीकॉप्टर किराए पर देना जारी रखे हुए है, जिससे यह आधिकारिक यात्राओं के लिए मुख्य विकल्प बना हुआ है।
भारत का निजी जेट बेड़ा (India's Private jet fleet) 2024 तक 168 तक बढ़ चुका है, जो पिछले वर्षों की तुलना में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। बढ़ती मांग ने केंद्र और राज्य सरकारों को 2025 में वीआईपी ट्रैवल के लिए अपने स्वयं के जेट खरीदने पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है।
हालांकि इस योजना पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत का निजी हेलीकॉप्टर क्षेत्र (India's private helicopter sector) 2030 तक 524.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (46 अरब, 52 करोड़ 42 लाख 90 हजार रुपये) तक पहुंच जाएगा।
टाटा-एयरबस यूनिट का विस्तार डीजीसीए के नए नियम और निजी क्षेत्र की वृद्धि से कर्नाटक के विमानन बाजार को और गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि उच्च अधिग्रहण लागत (high acquisition cost) और सख्त नियामक बाधाएं (Strict regulatory hurdles) इसकी गति को धीमा कर सकती हैं। कुल मिलाकर कर्नाटक देश के निजी विमानन परिदृश्य (private aviation landscape) में एक प्रमुख राज्य के रूप में तेजी से स्थापित हो रहा है।
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