Lenovo's India Plan: भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का बड़ा बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट का मजबूत केंद्र भी बनता जा रहा है। इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए लेनोवो ने ऐलान किया है कि वह भारत से एआई सर्वर का डिजाइन, निर्माण और निर्यात करने की तैयारी में है। कंपनी भारत को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस के लिए अहम एक्सपोर्ट बेस के तौर पर विकसित करना चाहती है।
बेंगलुरु से डिजाइन, पांडिचेरी से निर्माण
CES 2026 के दौरान लेनोवो के उपाध्यक्ष और महाप्रबंधक स्कॉट टीज ने बताया कि बेंगलुरु की लैब में एआई सर्वर सिस्टम डिजाइन होंगे और पांडिचेरी के प्लांट में उनका निर्माण किया जाएगा।
स्कॉट टीज के मुताबिक, लेनोवो भारत में अपने कई सिंगल और टू-सॉकेट सिस्टम तैयार करेगी, जिन्हें भविष्य के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ माना जा रहा है। डिजाइन, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग, तीनों काम भारत में ही होंगे। कंपनी इसे अपनी वैल्यू चेन का अहम हिस्सा मान रही है।
भारत बनेगा निर्यात हब
लेनोवो का फोकस फिलहाल “भारत के लिए भारत” मॉडल पर है। कंपनी पहले ही भारत में मोबाइल फोन और पर्सनल कंप्यूटर का सफलतापूर्वक निर्माण कर रही है। इसी अनुभव के आधार पर लेनोवो को भरोसा है कि भारत में बने सर्वर दुनिया भर में एक्सपोर्ट करने में कोई बड़ी रुकावट नहीं आएगी।
सरकार की योजना और समर्थन
लेनोवो इंडिया उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है, जिन्हें ₹17,000 करोड़ की आईटी हार्डवेयर प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के लिए चुना गया है। इससे भारत में हाई-एंड टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नियामकीय माहौल पर बात करते हुए लेनोवो के अधिकारियों ने भारत सरकार के ‘सॉवरेन एआई’ विजन की तारीफ की। इसका मतलब है कि देश अपनी कंप्यूटिंग क्षमता खुद विकसित करे और टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर बने।
पर्यावरण और ऊर्जा पर ध्यान
एआई डेटा सेंटर्स की बढ़ती बिजली खपत को लेकर चिंता जताते हुए स्कॉट टीज ने कहा कि अब इंडस्ट्री को पारंपरिक एयर कूलिंग से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने बताया कि सामान्य डेटा सेंटर्स में एयर कंडीशनिंग से लागत 40% तक बढ़ जाती है।
लेनोवो अपनी ‘नेपच्यून’ लिक्विड कूलिंग टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ा रहा है, जो ऊर्जा खपत को करीब 40% तक कम कर सकती है। इसके साथ ही इससे निकलने वाली गर्मी को दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है, जिससे पर्यावरण पर दबाव भी घटेगा।
लेनोवो का यह कदम भारत को टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग में नई ऊंचाई देगा। एआई सर्वर का डिजाइन और निर्माण यहां होने से भारत न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी करेगा बल्कि दुनिया के लिए भी बड़ा निर्यातक बनेगा।