
Tata Trusts Rift: पिछले दिनों टाटा ट्रस्ट्स से बाहर किए गए मेहली मिस्त्री ने मौजूदा चेयरमैन नोएल टाटा को एक भावुक पत्र लिखा है। इस पत्र में मिस्त्री ने दिवंगत रतन टाटा से किया गया अपना वादा दोहराया। सामने आई जानकारी के मुताबिक, मिस्त्री ने लिखा कि उनकी जिम्मेदारी है कि ट्रस्ट्स को किसी विवाद में न घसीटा जाए। उन्होंने कहा, 'रतन टाटा की दृष्टि के प्रति मेरी प्रतिबद्धता में यह भी शामिल है कि टाटा ट्रस्ट्स विवादों में न पड़ें। ऐसा करना ट्रस्ट्स की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।'
मिस्त्री ने बताया कि वे अपने कार्यकाल के दौरान रतन टाटा के सिद्धांतों, नैतिक शासन, शांत परोपकारिता और पूर्ण सत्यनिष्ठा से निर्देशित रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे के ट्रस्टी भी पारदर्शिता, सुशासन और जनहित के सिद्धांतों का पालन करेंगे। पत्र के अंत में मिस्त्री ने लिखा, 'मैं विदा लेता हूं'और रतन टाटा के शब्दों को उद्धृत किया- 'कोई भी व्यक्ति उस संस्था से बड़ा नहीं होता, जिसकी वह सेवा करता है।' यह संदेश टाटा समूह की संस्थागत विरासत को सर्वोपरि रखने की याद दिलाता है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट एचपी रानीना ने एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत में मेहली मिस्त्री की तारीफ की। उन्होंने कहा, 'मेरी नजर में मेहली मिस्त्री बहुत शालीन व्यक्ति हैं और टाटा के हित उनके दिल में हैं।' रानीना का मानना है कि मिस्त्री का पत्र न केवल गरिमामय है, बल्कि यह ट्रस्ट्स की छवि को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मिस्त्री अपनी ट्रस्टीशिप को खत्म करने को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास केविएट दाखिल किया है। इसके तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने से पहले उन्हें सुनवाई का अधिकार मिलेगा।
नियमों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स को बोर्ड में बदलाव के लिए चैरिटी कमिश्नर की मंजूरी लेनी होती है और इसके लिए 90 दिन का समय दिया जाता है। पिछले हफ्ते खबर आई थी कि वेणु श्रीनिवासन, नोएल टाटा और विजय सिंह ने मिस्त्री की आजीवन ट्रस्टीशिप की नवीनीकरण प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
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