Donald Trump Tariff on Seafood Exports: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में भारत पर टैरिफ बम फोड़ा था, जिसका असर कई सेक्टर पर पड़ा। हालांकि मोदी सरकार की रणनीति से अब भारत इस टैरिफ की दीवार को तोड़कर बाहर निकल रहा है। अमेरिका ने भारत के सीफूड सेक्टर खासकर झींगा निर्यात पर 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगा दिया था। इस वजह से सीफूड इंडस्ट्री को अगस्त में भारी नुकसान हुआ। कई प्रोसेसिंग यूनिट्स बंद हो गईं और झींगा निर्यात में 59 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर इस टैरिफ के चलते भारत का अमेरिका पर झींगा निर्यात लगभग ठप हो गया था।
यूरोप में खुला है दरवाजा
हालांकि आपदा में भी अवसर निकालने वाली मोदी सराकर ने और सीफूड इंडस्ट्री में ट्रंप के इस टैरिफ का तोड़ निकाल लिया है। शुरुआत में थोड़ी दिक्कतें आई, लेकिन नए बाजारों की तलाश में भारत के लिए यूरोप ने दरवाजे खोल दिए। रूस ने भारत की 25 मरीन प्रोसेसिंग यूनिट्स को अपने बाजार में सीधे एक्सपोर्ट की अनुमति दी, वहीं यूरोपीय संघ ने भी भारत की 102 नई मरीन यूनिट्स को मंजूरी दी है। मोदी सरकार अभी भी रुकी नहीं है और नए रास्तों की तलाश कर रही है। अभी भारत की बात UAE के साथ चल रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो मोदी सरकार की सक्रिय कूटनीति और व्यापार नीति से भारत के लिए नए रास्ते खुल जाएंगे।
UAE से भी चल रही बातचीत
लेकिन मोदी सरकार और इंडस्ट्री ने हार नहीं मानी। सरकार ने एक मजबूत रणनीति अपनाई और नए बाजारों की तलाश शुरू कर दी। सबसे बड़ा कदम रूस के साथ हुआ, जहां भारत की 25 मरीन प्रोसेसिंग यूनिट्स को अपने बाजार में सीधे एक्सपोर्ट की अनुमति मिली। इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने भारत की 102 नई मरीन यूनिट्स को मंजूरी दी, जिससे भारत के समुद्री उत्पादों को यूरोप में अच्छा बाजार मिला। इसी के साथ भारत UAE के साथ भी निर्यात बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहा है। यह सब मोदी सरकार की सक्रिय कूटनीति और व्यापार नीति का नतीजा है, जिसने भारत के लिए नए रास्ते खोले।
कैसे किया भारत ने कमबैक?
2024-25 में भारत ने झींगा एक्सपोर्ट में फिर तेजी दिखाई और रिकॉर्ड 4.88 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट हासिल किया, जो देश के कुल समुद्री भोजन निर्यात का करीब दो-तिहाई हिस्सा है। यह कमबैक इसलिए भी खास है क्योंकि साल के मिड में ही ट्रंप ने टैरिफ नाम का बम फोड़ दिया था। ऐसे में ये रिकॉर्ड बनाना अपने आप में एक चैलेंज था। ऐसे में ये सब कुछ टैरिफ के चैलेंज को लेकर बनाई गई सरकारी और इंडस्ट्री की सामूहिक रणनीति से ही संभव हो पाया है। नए बाजार खुलने से अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम हुई और निर्यातकों को नुकसान से उबरने में मदद मिली।कुल मिलाकर, मोदी सरकार की व्यापार और कूटनीति रणनीति ने भारत की सीफूड इंडस्ट्री को ट्रंप के टैरिफ के संकट से बाहर निकाला। इंडस्ट्री ने नए बाजार तलाश कर अपनी निर्यात क्षमता को मजबूत किया और अमेरिका सहित कई बाजारों में फिर से अपनी पकड़ बनाई।