प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को हुई फोन पर बातचीत से लंबे समय से रुके द्विपक्षीय व्यापार समझौते को राजनीतिक रफ्तार मिली है। लेकिन, डील को अंतिम रूप देने की आखिरी राह मुश्किल भरी साबित हो रही है। इस घटनाक्रम से परिचित एक व्यक्ति ने बताया कि डील के फ्रेमवर्क को फाइनल करने के लिए गहन बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि डील का स्वरूप अभी भी तय किया जा रहा है और यह एक मुश्किल राजनीतिक फैसला होता जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि भारत-अमेरिका में ट्रेड डील हो गई तो क्या भारत के सामानों पर लगा अमेरिका में लगा 50% टैरिफ घटकर कितना तक आ सकता है?
फोन कॉल के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर काफी संयमित पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने न तो व्यापार समझौते और न ही रूसी ऊर्जा आयात का कोई जिक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप, आपके फोन कॉल और दिवाली की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। रोशनी के इस त्योहार पर हमारे दोनों महान लोकतंत्र दुनिया को उम्मीद की रोशनी से प्रकाशित करते रहें और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ एकजुट रहें।' अमेरिका के पाकिस्तान के साथ बढ़ते सुरक्षा संबंधों के बीच मोदी की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है।
इससे पहले व्हाइट हाउस में दिवाली के एक स्पेशल इवेंट में ट्रंप ने दीया जलाया और पत्रकारों को बताया कि उन्होंने मोदी से बात की है। उन्होंने मोदी को 'महान दोस्त' बताया और कहा कि भारत और अमेरिका 'कुछ बेहतरीन डील' पर काम कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि मोदी ने उन्हें भारत की रूसी तेल खरीद रोकने का आश्वासन दिया है। और इस दावेदारी से फिर नहीं चूके कि उन्होंने मई में भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोका था।
हालांकि, इससे परिचित लोगों ने स्पष्ट किया कि बुधवार की फोन कॉल में पाकिस्तान के साथ भारत के सैन्य संघर्ष के मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई है, जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे के विपरीत है। एक और दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने रूसी तेल आयात पर भी अपना रुख नरम कर लिया। पहले उन्होंने दावा किया था कि मोदी ने इसे पूरी तरह रोकने का आश्वासन दिया है, लेकिन बाद में उन्होंने इसे केवल कम करने की बात कही।
ट्रंप ने कहा, 'हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं, और वह (मोदी) रूस से ज्यादा तेल नहीं खरीदेंगे। वह रूस और यूक्रेन के साथ उस युद्ध को समाप्त होते देखना चाहते हैं। और जैसा कि आप जानते हैं, वे बहुत अधिक तेल नहीं खरीदने जा रहे हैं। उन्होंने इसे काफी कम कर दिया है, और वे इसे लगातार कम करते जा रहे हैं।'
फिलहाल, भारत के कच्चे तेल आयात का लगभग 34% हिस्सा रूस से आता है, जबकि देश की तेल और गैस की जरूरतों का लगभग 10% (मूल्य के हिसाब से) अमेरिका से आता है। भारत अमेरिका से तेल आयात बढ़ा सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, इस प्रस्तावित डील के तहत भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 15% तक किया जा सकता है यानी टैरिफ में 35% की कटौती हो सकती है।
व्हाइट हाउस के दिवाली इवेंट में अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा, एफबीआई चीफ काश पटेल, इंटेलिजेंस हेड तुलसी गबार्ड, भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और कुछ भारतीय-अमेरिकी बिजनेस लीडर्स मौजूद थे। मोदी और ट्रंप आखिरी बार फरवरी में मिले थे, जब प्रधानमंत्री एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन (Bilateral Summit) के लिए वॉशिंगटन गए थे। तब उन्होंने साझेदारी को बढ़ाने के लिए एक रोडमैप की घोषणा की थी।
हालांकि, इसके बाद ट्रंप के बार-बार यह दावा करने पर कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के गतिरोध को रोका था, रिश्तों में खटास आ गई थी। फिर ट्रंप ने भारत पर 50% के कड़े टैरिफ लगा दिए, जिसमें रूसी तेल खरीदने के लिए प्रतिबंध के रूप में 25% टैरिफ भी शामिल था। हाल के समय में, मोदी और ट्रंप के बीच दिवाली की शुभकामनाओं सहित तीन फोन कॉल के साथ संबंधों में सुधार के संकेत दिखे हैं। मोदी ने ट्रंप के गाजा शांति प्लान और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी मुलाकात का भी समर्थन किया था।
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