इश्योरेंस सेक्टर में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को मिले एक बराबर मौका, सांसद ने की मांग

संसद में आज सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक, 2025 पर चर्चा हुई। इस दौरान कई इश्योरेंस सेक्टर में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को एक सामन मौका देने की बात कही गई। 

Shivam Shukla( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड16 Dec 2025, 08:33 PM IST
इश्योरेंस सेक्टर में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को मिले एक बराबर मौका
इश्योरेंस सेक्टर में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को मिले एक बराबर मौका

Insurance Reform Bill 2025: इश्योरेंस सेक्टर में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को एक बाराबर अवसर देने की मांग फिर से उठी है। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद जी एम हरीश बालयोगी ने मंगलवार को लोकसभा में ‘सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक, 2025' पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि इश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत फॉरेन डायरेक्टर इन्वेस्टमेंट (FDI) से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसके साथ ही कंज्यूमर्स को अधिक ऑप्शन मिलेंगे, लेकिन पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के लिए बराबर अवसर सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है।

इस बिल से धोखाधड़ी पर लगेगा अंकुश

शिवसेना सांसद रवींद्र वायकर ने कहा कि इस बिल से बीमा क्षेत्र में धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा और आम लोगों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि यह बिल भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को और ज्यादा अवसर देगा। इसके साथ ही उसे प्राइवेट कंपनियों से मुकाबला करने में मदद मिलेगी। वहीं, भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि इस बीमा विधेयक से भारत के एक सशक्त और विकसित राष्ट्र बनने की बुनियाद मजबूत होगी।

कुछ सांसदों ने बिल का किया विरोध

द्रमुक सांसद डी एम कथीर आनंद ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए सामाजिक सुरक्षा को बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि 100 प्रतिशत FDI का मतलब यह होगा कि प्रीमियम से लेकर सबकुछ विदेशी कंपनियों की तरफ निर्धारित किया जाएगा।

बिल को संसद समिति के पास भेजने की मांग

समाजवादी पार्टी के राजीव राय ने आरोप लगाया कि यह विधेयक ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के खिलाफ है। यह एक सोची-समझी साजिश है। राष्ट्रीय जनता दल के अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह बिल बीमा के बाजारीकरण के लिए लाया गया है। उन्होंने विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजे जाने की मांग की।

वाईएसआरसीपी सांसद ने किया समर्थन

भाजपा के मन्नालाल रावत और दर्शन सिंह चौधरी ने जहां इसे सामाजिक और आर्थिक महत्व का विधेयक बताया, वहीं वाईएसआरसीपी के वाई. एस. अविनाश रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन करती है, बशर्ते यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि आम लोगों के ऊपर इसके प्रावधानों का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

माकपा के के. राधाकृष्णन ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की सरकार से मांग की। उन्होंने कहा कि एलआईसी और जीआईसी ने सामाजिक संरक्षण में अहम भूमिका निभाई, लेकिन नये विधेयक से इनका प्रभाव कम होगा।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर, भाकपा के वी. सेल्वाराज, कांग्रेस के वी.वैथिलिंगम, केरल कांग्रेस के एडवोकेट के.फ्रांसीस जॉर्ज और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन. के. प्रेमचंद्रन ने विधेयक का विरोध किया।

सरकार LIC और GIC को बेचने के प्रयास में: विपक्ष

प्रेमचंद्रन ने कहा कि बीमा क्षेत्र में शत-प्रतिशत एफडीआई से सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी ‘एलआईसी’ के एजेंटों पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को एलआईसी और जीआईसी को बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल, निर्दलीय विशालदादा प्रकाशबापू पाटिल, निर्दलीय अब्दुल रशीद और भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत, निर्दलीय राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर तथा भाकपा (माले) लिबरेशन के सुदामा प्रसाद ने विधेयक का विरोध किया।

निर्दलीय उमेशभाई पटेल ने सरकार के इस कदम की सराहना की। उन्होंने, हालांकि यह भी कहा कि इस विधेयक में ‘कंपोजिट लाइसेंस’ का प्रावधान होना चाहिए था।

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