
New Business Registrations: फरवरी महीने में नई कंपनी के रजिस्ट्रेशन में शानदार बढ़ोती देखने को मिली है। फरवरी 2026 में नएबिजनेस रजिस्ट्रेशन बढ़कर 24,136 हो गए। यह एक साल पहले के मुकाबले 37 फीसदी ज्यादा है। इतना ही नहीं यह आकड़े मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में दूसरा सबसे ज़्यादा है। इससे पता चल रहा है कि स्टार्टअप सेंटीमेंट में मजबूती आई है। मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स के डेटा के मुताबिक अक्टूबर और नवंबर में नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में सुस्ती आई थी। इसके बाद इसमें तेजी आई है।
अक्तूबर महीने में 15,000 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। वहीं नवंबर 2025 में 14,000 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इसके बाद जनवरी में रजिस्ट्रेशन बढ़कर 23,280 हो गए। वहीं फरवरी महीने में कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में और तेजी आई है।
ज़्यादातर नए बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां हैं। उदाहरण के लिए, जनवरी में बनी कंपनियों का एवरेज पेड-अप कैपिटल ₹600,000 था। इससे पता चल रहा है कि एंटरप्रेन्योरशिप छोटे बिज़नेस से बढ़ रही है। डेटा के मुताबिक, ऑथराइज़्ड कैपिटल या नए बिज़नेस को जुटाने की ज़्यादा से ज़्यादा कैपिटल, पेड-अप कैपिटल का दो से तीन गुना है। इससे कहा जा रहा है कि भविष्य में निवेश में तेजी आएगी। हर महीने नई सरकारी कंपनियों में सिर्फ़ कुछ ही शामिल होती थीं और वे सोशल सेक्टर की पहल, पावर ट्रांसमिशन, या दूसरे यूटिलिटी बिज़नेस को मैनेज करने वाली एंटिटी तक ही सीमित रहती थीं।
नए बिज़नेस रजिस्ट्रेशन में सर्विस सेक्टर, खासकर IT सर्विस, कंसल्टेंसी और प्रोफेशनल सर्विस का दबदबा रहा। हर महीने औसतन लगभग 300 AI से जुड़े बिज़नेस शुरू होते हैं। डेटा से पता चला कि फरवरी में 248 AI-फोकस्ड कंपनियां बनीं। सर्विसेज़ सेक्टर का दबदबा इकॉनमी के हिसाब से रहता है। इस सेक्टर का इकॉनमिक आउटपुट में आधे से ज़्यादा हिस्सा है। डेटा से पता चला कि होलसेल और रिटेल ट्रेडिंग नए बिज़नेस रजिस्ट्रेशन का एक और अहम एरिया है।
टैक्स और कंसल्टिंग फर्म AKM ग्लोबल के मैनेजिंग पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा कि कंपनी रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 37 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे बिज़नेस सेंटिमेंट में सुधार और इकोनॉमी के लगातार फॉर्मलाइज़ेशन के मज़बूत संकेत मिल रहे हैं। बता दें कि जब काम करने के लिए नियम, जिम्मेदारियाँ और प्रक्रियाएँ लिखित रूप में तय कर दी जाती हैं, तो इसे फॉर्मलाइज़ेशन कहते हैं। कहने का मतलब ये हुआ कि पहले अगर कोई काम बिना नियम के हो रहा था, और बाद में उसके लिए नियम बना दिए गए, तो यह फॉर्मलाइज़ेशन है।
माहेश्वरी ने कहा कि फरवरी में इस फाइनेंशियल ईयर में दूसरा सबसे ज़्यादा इनकॉर्पोरेशन हुआ। इससे पता चलता है कि एंटरप्रेन्योर अगले ग्रोथ साइकिल के लिए तैयारी कर रहे हैं। हालांकि सिर्फ रजिस्ट्रेशन से इकोनॉमिक बढ़ोतरी की गारंटी नहीं मिलती, लेकिन यह ट्रेंड साफ तौर पर भारत के रेगुलेटरी और ग्रोथ फ्रेमवर्क में भरोसे का संकेत है। इस फाइनेंशियल ईयर में भारत की इकोनॉमी के 7.6% की दर से बढ़ने का अनुमान जताया गया है। एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि कंपनी रजिस्ट्रेशन में तेज़ी सिर्फ़ साइक्लिकल नहीं है, बल्कि यह स्ट्रक्चरल और इंस्टीट्यूशनली ड्रिवन है।
जब किसी संस्था, कंपनी या विचार को कानूनी रूप से स्थापित करके उसमें शामिल किया जाता है, तो उसे इनकॉर्पोरेशन कहा जाता है। कहने का मतलब ये हुआ कि जब कोई नया बिजनेस सरकार के नियमों के अनुसार कंपनी के रूप में रजिस्टर होता है, तो उसे कंपनी का इनकॉर्पोरेशन कहते हैं।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
MoreOops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.