India Ethanol Plan: मिडिल ईस्ट में जारी जंग की वजह से दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत शुरू हो गई। भारत भी अछूता नहीं रहा। इस बीच भारत इस समस्या से निपटने के लिए नए रास्ते की तलाश की है। इससे बजट कंट्रोल होगा और देश को एनर्जी सेक्टर में मजबूती मिलेगी। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को 100 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग की ओर बढ़ना चाहिए। उनका मानना है कि इससे देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है और विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी।
इंडियन फेडरेशन ऑफ़ ग्रीन एनर्जी के ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि दुनिया में चल रहे तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में, तेल सप्लाई पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनना बहुत जरूरी है। मौजूदा समय में भारत अपनी जरूरत का लगभग 87% तेल बाहर से मंगाता है। इससे देश पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये पेट्रोल और डीजल के आयात पर खर्च होते हैं। अगर एथेनॉल जैसे फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ेगा, तो यह खर्च कम हो सकता है और प्रदूषण भी कम होगा।
क्या है एथेनॉल ब्लेंडिंग?
पेट्रोल या डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों में एथेनॉल को एक निश्चित अनुपात में मिलाने की प्रक्रिया को 'एथेनॉल ब्लेंडिंग' कहा जाता है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है। यह मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे, मक्का, सड़े-गले आलू, और खराब हो चुके चावल या गेहूं से बनाया जाता है। खास बात है कि यह एक रिन्यूएबल फ्यूल है।
E20 पेट्रोल से आगे बढ़ने की तैयारी
सरकार पहले ही E20 पेट्रोल यानी 20 फीसदी एथेनॉल मिक्स फ्यूल की शुरुआत कर चुकी है। साल 2023 में इसे लॉन्च किया गया था। अब कई गाड़ियां इसमें छोटे बदलाव के साथ आसानी से चल सकती हैं। इससे इंजन को भी ज्यादा नुकसान नहीं होता है। नितिन गडकरी ने उदाहरण देते हुए बताया कि ब्राजील जैसे देश 100 फीसदी एथेनॉल का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों को बढ़ावा देना जरूरी है, जो अलग-अलग तरह के ईंधन पर चल सकती हैं।
100% एथेनॉल ब्लेंडिंग से क्या मतलब?
100% एथेनॉल मिश्रण (E100) का मतलब लगभग शुद्ध जलयुक्त एथेनॉल से बने ईंधन से है। इसका उपयोग स्टैंडर्ड पेट्रोल इंजनों के बजाय स्पेशल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) में किया जाता है। यह टिकाऊ ईंधन गैसोलीन का एक स्वच्छ, हाई-ऑक्टेन विकल्प है। इसका मकसद उत्सर्जन को कम करना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है। इसलिए इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
100% एथेनॉल ब्लेंडिंग के लागू होने पर वाहन चलाने के लिए पेट्रोल की निर्भरता खत्म हो जाएगी। इससे भारत के कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी। शुद्ध एथेनॉल जलने पर कार्बन और जहरीली गैसों का उत्सर्जन ना के बराबर होता है। ऐसे में प्रदूषण मुक्त बनाने में भी यह ईंधन बड़ी भूमिका निभाता है। दरअसल, एथेनॉल, कृषि पदार्थ से बनाया जाता है। लिहाजा इसका उपयोग बढ़ने से देश के किसानों (गन्ना, मक्का, चावल उगाने वाले) और उत्पादन करने वाले फैक्टरियों को फायदा होगा।
कितनी कम होगी लागत?
शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की उत्पादन लागत (प्रति लीटर) आमतौर पर कम होती है। 100% एथेनॉल फ्यूल, पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता होता है। भारत में इसके 60 से 70 रुपये प्रति लीटर के आसपास रहने का अनुमान है। मौजूदा समय में भारत में पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाया जा रहा है। इस 20% ब्लेंडिंग वाले ईंधन को E20 (Ethanol 20) कहा जाता है।