Bata footwear trends in India: बाटा इंडिया अपने कारोबार को नए लेवल पर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी अब न केवल छोटे शहरों में अपनी पहुंच बढ़ा रही है, बल्कि भारत को दुनिया के लिए फुटवियर सप्लाई हब बनाने पर भी काम कर रही है। ग्राहकों की बदलती पसंद और प्रीमियम जूतों की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी अपनी रणनीति में बड़े बदलाव कर रही है।
स्टोर नेटवर्क को बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य
बाटा इंडिया के पास फिलहाल करीब 2,000 स्टोर्स का नेटवर्क है। कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) और सीईओ गुंजन शाह के मुताबिक, अगले तीन से पांच साल में इन स्टोर्स की संख्या को 3,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह विस्तार मुख्य रूप से टियर 3 और टियर 4 शहरों में किया जाएगा। कंपनी को उम्मीद है कि छोटे शहरों में शहरीकरण बढ़ने से जूतों की मांग में तेजी आएगी।
फ्रेंचाइजी मॉडल पर ज्यादा जोर
कंपनी अपने विस्तार के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल का सहारा लेगी। अभी बाटा के 2,000 स्टोर्स में से 700 फ्रेंचाइजी मॉडल पर चल रहे हैं। आगे बढ़ने वाले 1,000 नए स्टोर्स में से लगभग 80% फ्रेंचाइजी के जरिए खोले जाएंगे। गुंजन शाह का मानना है कि छोटे शहरों में जहां ग्राहकों की संख्या कम होती है, वहां फ्रेंचाइजी मॉडल ज्यादा सफल रहता है।
डिजिटल और ओमनीचैनल से आसान होगी शॉपिंग
बाटा अपने स्टोर्स को डिजिटल बना रही है ताकि ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिल सके। कंपनी अपने 2,000 स्टोर्स को डिलीवरी पॉइंट्स की तरह इस्तेमाल कर रही है। वर्तमान में 40% स्टोर्स 'ओमनीचैनल' से लैस हैं, जिसे जल्द ही 100% करने की योजना है। इससे ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर करके स्टोर से सामान पा सकेंगे या स्टोर से सीधे घर पर डिलीवरी ले सकेंगे।
नवाचार और प्रीमियम जूतों का बढ़ता क्रेज
बाजार में अब लोग कैजुअल और प्रीमियम जूते ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बाटा का 'फ्लोट्ज' (Floatz) ब्रांड सिर्फ तीन साल में 200 करोड़ रुपये के सालाना रन रेट तक पहुंच गया है। इसके अलावा, पावर और नॉर्थ स्टार जैसे ब्रांड्स के जरिए स्नीकर्स की डिमांड भी बढ़ी है। हालांकि, महंगाई की वजह से 1,000 रुपये से कम कीमत वाले जूतों की बिक्री पर थोड़ा असर पड़ा है, लेकिन प्रीमियम जूतों की सेल शानदार रही है।
भारत बनेगा दुनिया के लिए सोर्सिंग हब
बाटा 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देते हुए अपने 99.5% प्रॉडक्ट्स भारत में ही बनाती है। अब कंपनी भारत को ग्लोबल सोर्सिंग हब बनाने की तैयारी में है। अभी कंपनी हर साल 10 लाख जोड़ी जूते एक्सपोर्ट करती है। अगले 3-5 साल में इसे बढ़ाकर 30 से 50 लाख जोड़ी तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए एक खास टीम भी बनाई गई है जो यूरोप, लैटिन अमेरिका और एशिया-प्रशांत के बाजारों को जूते सप्लाई करेगी।
निवेश और कमाई की योजना
कंपनी हर साल करीब 100 करोड़ रुपये का निवेश करती है। भविष्य में इस केपेक्स को बढ़ाकर 100 से 120 करोड़ रुपये सालाना करने की योजना है। इस फंड का इस्तेमाल नए स्टोर खोलने और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने में होगा। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहर अभी भी कंपनी के लिए सबसे ज्यादा कमाई वाले बाजार बने हुए हैं।