घरेलू हवाई किराए में नहीं होगी बढ़ोतरी, सरकार ने बनाया यह मेगा प्लान

जेट फ्यूल की कीमतों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के साथ ही तेल कंपनियों ने ATF के लिए एक नया 'फिक्स्ड प्राइसिंग' मॉडल पेश किया है। इससे अब 3 साल तक जेल फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी। यह नियम घरेलू हवाई सफर में लागू होगा। ऐसे में घरेलू हवाई सफर अचानक महंगा नहीं होगा।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड9 Jun 2026, 06:25 PM IST
विमानन कंपनियों के लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये का एक फंड बनाया है।
विमानन कंपनियों के लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये का एक फंड बनाया है।

पश्चिम एशिया संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और विमान ईंधन (ATF) की आसमान छूती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इससे न केवल एयरलाइन कंपनियों को राहत मिलेगी, बल्कि कहीं न कहीं इसका लाभ हम और आप तक भी पहुंचेगा। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगभग 10 फीसदी की बढ़ोतरी की गई। सरकारी फ्यूल कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखने की एक व्यवस्था शुरू की है।

इसके तहत घरेलू एयरलाइंस को तीन साल तक के लिए फ्यूल की एक निश्चित दर दी जाएगी। इस कदम का मकसद एयरलाइंस और यात्रियों को ग्लोबल ऑयल की कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव से बचाना है। इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल की कीमत अब 104.927 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।

3 साल तक नहीं बढ़ेंगे जेट फ्यूल के दाम

जो एयरलाइंस सरकार की कीमत स्थिर करने वाली स्कीम में शामिल होने का फैसला करेंगी, उनके लिए नई दर तीन साल तक के लिए तय कर दी जाएगी। जो एयरलाइंस इस स्कीम को नहीं चुनेंगी, उन्हें इंटरनेशनल एयरलाइंस की तरह ही मार्केट से जुड़ी कीमतें चुकानी होंगी। मौजूदा समय में यह करीब 142 रुपये प्रति लीटर है। रिपोर्ट के मुताबिक, जो एयरलाइंस 'प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन स्कीम' (कीमतों में स्थिरता लाने वाली योजना) को चुनेंगी, उन्हें ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) 115 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिलता रहेगा, चाहे ग्लोबल बेंचमार्क में उतार-चढ़ाव ही क्यों न हो। वहीं, जो एयरलाइंस इस स्कीम में शामिल नहीं होंगी, उन्हें कीमतें घटने पर तो फ़ायदा होगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दरें बढ़ने पर उन्हें ज़्यादा लागत का सामना भी करना पड़ेगा।

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किस मेट्रो शहर में कितना होगा दाम ?

इस वॉलंटरी स्कीम के तहत, इसमें शामिल एयरलाइंस 86.32 रुपये प्रति लीटर की तय FOB (फ्री-ऑन-बोर्ड) बेंचमार्क कीमत के साथ-साथ एयरपोर्ट चार्ज, ऑयल कंपनी का मार्जिन और लागू टैक्स का भुगतान करेंगी। इससे दिल्ली में प्रभावी बिक्री मूल्य 115 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 114.5 रुपये और चेन्नई में 139 रुपये प्रति लीटर होगा।

नई दर की तुलना दिल्ली में लगभग 105 रुपये प्रति लीटर के उस रेट से की जा सकती है जो मार्केट रेट से कम था। यह रेट दो महीने से ज़्यादा समय तक एक जैसा बना रहा, क्योंकि सरकार ने फरवरी के आखिर में वेस्ट एशिया में हुए संघर्ष की वजह से बढ़े ग्लोबल फ्यूल की कीमतों का सिर्फ़ कुछ हिस्सा ही ग्राहकों पर डाला था।

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कीमतों में इस ठहराव की वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर नुकसान उठाना पड़ा, ठीक वैसे ही जैसे पेट्रोल, डीजल और LPG सेगमेंट में दबाव देखा गया था।

सरकार ने बनाया 10,000 करोड़ का फंड

एयरलाइंस पर बढ़ते लागत दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के एटीएफ प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सरकारी तेल कंपनियों को ब्याज फ्री वित्तीय सहायता दी जाएगी ताकि वे एयरलाइंस को नियंत्रित और अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों पर ईंधन उपलब्ध करा सकें। इसका मकसद ATF की कीमतों को एक सीमा में रखना और एयरलाइंस को भू-राजनीतिक तनावों से जुड़ी कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाना है।

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इसके साथ ही सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति को भी मज़बूत करना है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विमानन कंपनियों के परिचालन खर्च में अचानक आने वाले झटकों को कम किया जा सकेगा और हवाई किरायों में अनियंत्रित वृद्धि को रोका जा सकेगा। इस योजना के तहत, जब भी ग्लोबल बेंचमार्क कीमतें 86.32 के बेस रेट से ऊपर जाएंगी, तो सरकार तेल मार्केटिंग कंपनियों को अंतर की भरपाई के लिए बिना ब्याज वाला एडवांस देगी। जब कीमतें कम होंगी, तो यह अंतर कंपनियों से वसूला जाएगा और भारत के कंसोलिडेटेड फंड (Consolidated Fund of India) में वापस जमा कर दिया जाएगा।

बढ़ जाएगा ऑपरेटिंग खर्च

आमतौर पर ATF एयरलाइन के ऑपरेटिंग खर्च का लगभग 40 प्रतिशत होता है और कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के समय यह 60 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। सूत्रों ने बताया कि मई में इंटरनेशनल जेट फ्यूल की कीमतें युद्ध से पहले के 60.50 रुपये प्रति लीटर के रेट से बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं।

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इससे एयरलाइन के ऑपरेटिंग खर्च और किराए में संभावित बढ़ोतरी को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था कोई सब्सिडी नहीं है, बल्कि एक अस्थायी स्टेबिलाइज़ेशन फ्रेमवर्क है जिसका मकसद फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कम करना और साथ ही जवाबदेही, निगरानी और फंड की पूरी रिकवरी सुनिश्चित करना है।

यात्रियों को होगा फायदा

यात्रियों के लिए इस फैसले का सबसे अहम फायदा यह है कि इससे हवाई किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को काबू करने में मदद मिलेगी, जो अक्सर फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल के कारण होती है। फ्यूल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के असर को एयरलाइंस के लिए कम करके, सरकार का मकसद यात्रियों पर ऐसे खर्चों का बोझ कम करना और किराए में ज़्यादा स्थिरता लाना है।

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