
अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इस बीच S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा कि IOC, BPCL और HPCL जैसी तेल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि महंगाई को काबू में करने के लिए ये कंपनियां पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रख सकती हैं।
US-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। इस हफ्ते की शुरुआत में क्रूड ऑयल USD 100 प्रति बैरल से ज़्यादा हो गया था, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बंद हो गई। यह रूट दुनिया के लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण है। गुरुवार को कच्चे तेल के दाम 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहे हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने हाल ही में ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत अनुमान को 5 डॉलर बढ़ाकर 65 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत पूरी करने के लिए समुद्री रूट पर निर्भर रहेगा। हालांकि देश ने एशिया के बाहर के देशों जैसे रूस और दक्षिण अमेरिका से तेल खरीदने का विकल्प भी अपनाया है। मौजूदा समय में भारत रूस से लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीद रहा है, जबकि वेनेजुएला से भी पिछले महीने से लगभग 1.42 लाख बैरल प्रतिदिन तेल की खरीद फिर से शुरू हो गई है।
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि भारत को अपनी कच्चे तेल की जरूरतें पूरी करने के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भर रहना पड़ेगा, हालांकि इसमें कुछ डायवर्सिफिकेशन (विविधता) की गुंजाइश बनी हुई है। इसकी वजह ये है कि भारत पहले भी एशिया के बाहर रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों से तेल खरीदता रहा है। रिपोर्ट के अनुसार रूस से भारत का आयात फिलहाल करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन है जबकि वेनेजुएला से आयात पिछले महीने फिर शुरू हुआ और यह लगभग 1,42,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 फीसदी आयात करता है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। देश की कुल खपत लगभग 58 लाख बैरल प्रतिदिन है जिसमें से करीब 25 से 27 लाख बैरल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। स्ट्रेट में LPG का 55 फीसदी और LNG की खपत का 30 फीसदी हिस्सा आता है। एसएंडपी ने कहा कि इस मार्ग पर उच्च निर्भरता के बावजूद भारत के पास सीमित भंडार है। देश के रणनीतिक पेट्रोलियम स्टॉक लगभग 10 दिन की खपत के लिए पर्याप्त हैं जबकि कमर्शियल स्टॉक करीब 65 दिन के लिए पर्याप्त हो सकता है। एलपीजी और एलएनजी के भंडार इससे भी कम हैं।
रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती कीमतें एवं सरकारी निर्देश तेल कंपनियों के मुनाफे को कम कर सकते हैं। हालांकि, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) पर जोखिम कम होगा क्योंकि ऊंची कीमतों से उनकी बिक्री बढ़ती है और उनका पश्चिम एशिया से परिचालन जोखिम सीमित है। इधर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बाजार और नियामकीय दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
एसएंडपी ने कहा कि भारत में कंज्यूमर्स के लिए LPG की कीमतें रेगुलेट की जाती हैं। बढ़ती कीमतों के बीच आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को महंगाई के दबाव को कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें स्थिर रखनी पड़ सकती हैं। इससे उनके ‘मार्जिन’ पर असर पड़ सकता है। ऐसे में एजेंसी ने कहा कि सरकार बजट में छूट और एक्साइज ड्यूटी में कटौती के जरिए इन कंपनियों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकती है, जैसा उसने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान किया था, लेकिन ऐसे कदम उठाए जाने की संभावना अभी स्पष्ट नहीं है।
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