मेडिकल इमर्जेंसी के लिए भी पर्सनल लोन ले रहे हैं लोग, आंखें खोलने वाली है यह रिपोर्ट

Personal Loan Report: पैसाबाजार की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मेडिकल इमरजेंसी के लिए 11% लोग पर्सनल लोन लेते हैं। यह दर्शाता है कि हेल्थ इंश्योरेंस की कमी और चिकित्सा खर्चों के बढ़ने से लोग कर्ज लेने पर मजबूर हो रहे हैं।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड22 Jan 2026, 03:12 PM IST
 किन-किन हालात में पर्सनल लोन ले रहे हैं लोग, आ गई रिपोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)
किन-किन हालात में पर्सनल लोन ले रहे हैं लोग, आ गई रिपोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)

हर कोई इमर्जेंसी के लिए फंड जमा नहीं कर पाता, इसलिए आफत आने पर कर्ज लेता है। पैसाबाजार की एक कंज्यूमर रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में पर्सनल लोन लेने के सबसे बड़े कारणों में मेडिकल इमरजेंसी शामिल है। पैसाबाजार की रिपोर्ट 'द पर्सनल लोन स्टोरी' आंखें खोलने वाली है कि देश में अब भी हेल्थ इंश्योरेंस की कितनी कमी है। इस रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि लोग आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए ही नहीं, रोजमर्रा की जरूरतों और शौक पूरा करने के लिए भी बेधड़क लोन ले रहे हैं।

मेडिकल इमर्जेंसी के लिए भी पर्सनल लोन!

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 11% लोन लेने वालों ने मेडिकल इमरजेंसी और चिकित्सा खर्चों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन लिया। टियर-1 शहरों में यह आंकड़ा और भी अधिक 14% रहा, जबकि टियर-2 शहरों में 10% और टियर-3 शहरों में 8% दर्ज किया गया। ये आंकड़े देश में हेल्थ इंश्योरेंस की कम पहुंच और बढ़ती चिकित्सा लागतों की ओर इशारा करते हैं, जिसके कारण लोगों को मेडिकल इमरजेंसी में पर्सनल लोन पर निर्भर होना पड़ रहा है।

लोन पर आई रिपोर्ट पर एक नजर

  • अब लोन लेना सिर्फ जरूरत तक सीमित नहीं रहा। जहां 48% लोगों ने अपने आवश्यक खर्चों के लिए पर्सनल लोन लिया, वहीं 36% ने अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए और 16% ने बिजनेस में निवेश के लिए पर्सनल लोन लिया।
  • टियर 1 शहरों के उधारकर्ताओं की तुलना में टियर 3 शहरों के उधारकर्ताओं के अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोन लेने की संभावना 2.4 गुना अधिक है।
  • अपने बिजनेस पर निर्भर लोगों के व्यवसाय में निवेश के अलावा 9% नौकरीपेशा भी अपने पारिवारिक व्यवसाय, साइड बिजनेस या पैशन प्रोजेक्ट्स के लिए पर्सनल लोन ले रहे हैं।
  • मध्यम आय वर्ग वाले भारतीय अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सबसे अधिक क्रेडिट का उपयोग कर रहे हैं। 7.5 लाख से 10 लाख रुपये सालाना कमाने वाले उधारकर्ताओं में लाइफस्टाइल से जुड़े खर्चों के लिए लोन लेने की दर सबसे अधिक 40% देखी गई है।
  • 11% उधारकर्ताओं ने शादियों और समारोहों के लिए लोन लिया, जिसमें टियर-1 शहर 14% के साथ आगे रहे।
  • ऑनलाइन लोन की बढ़ती उपलब्धता के बावजूद कई लोग उधार लेने के लिए अभी भी ऑफलाइन माध्यमों पर निर्भर हैं। केवल 32% लोगों ने ही ऑनलाइन पर्सनल लोन का लाभ उठाया।
  • इम्पल्सिव बॉरोइंग या बिना प्लान किए लोन लेना अब आम होता जा रहा है। 25% उधारकर्ता अन्य क्रेडिट विकल्पों का मूल्यांकन किए बिना ही लोन ले लेते हैं, और यह व्यवहार Gen Z युवाओं में सबसे अधिक 31% देखा गया है।

लोन लेने के बढ़ते चलन पर क्या कहती हैं एक्सपर्ट?

पैसाबाजार की सीईओ संतोष अग्रवाल ने कहा, 'आज लोन लेने के फैसले ब्याज दरों या योग्यता साथ-साथ जीवन की घटनाओं, आकांक्षाओं और तात्कालिक जरूरतों से भी प्रभावित हो रहे हैं। यह अध्ययन ट्रांजेक्शनल डेटा से आगे बढ़कर उधारकर्ताओं के फैसलों के पीछे की सोच और व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने की हमारी कोशिश है। जैसे-जैसे उपभोक्ता व्यवहार तेजी से बदल रहा है, वैसे-वैसे पूरे इकोसिस्टम के लिए इन बदलावों को समझना और जिम्मेदार, पारदर्शी एवं समावेशी क्रेडिट उपलब्ध कराना और भी जरूरी होता जा रहा है।'

रोजमर्रा के खर्चों के लिए लोन ले रहे हैं लोग

यह रिपोर्ट भारत के 23 शहरों और कस्बों में 2,889 पर्सनल लोन उधारकर्ताओं की गहन पूछताछ पर आधारित है। इसके जरिए देश के विभिन्न क्षेत्रों, शहरों और आयु समूहों में कर्ज लेने के प्रमुख कारणों, प्राथमिकताओं, निर्णय को प्रभावित करने वाले कारकों और क्रेडिट जागरूकता के स्तर से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आई हैं। मेडिकल जरूरतों के साथ-साथ, उधारकर्ताओं ने रोजमर्रा के आवश्यक खर्चों, घर की तात्कालिक मरम्मत और शादी या अन्य समारोहों को भी पर्सनल लोन लेने के सबसे आम कारणों के रूप में बताया।

लोगों की चाहत- ऑफलाइन हो या ऑनलाइन, फटाफट मिले लोन

अध्ययन में यह भी सामने आया कि 91% उधारकर्ताओं ने लोन लेने के बाद के अनुभव को 'अच्छा' या 'बहुत अच्छा' बताया है। ऑफलाइन (58%) और ऑनलाइन (57%) दोनों ही माध्यमों में संतुष्टि का सबसे बड़ा कारण लोन मिलने की तेजी रही। इसके बाद सरल प्रक्रिया और कम कागजी कार्रवाई को महत्व दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता औपचारिकता के मुकाबले कार्यकुशलता को ज्यादा महत्व देते हैं।

ज्यादातर लोगों में क्रेडिट स्कोर की कमजोर समझ

क्रेडिट की समझ की बात करें तो रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि अधिकांश भारतीय भले ही क्रेडिट से परिचित हैं, लेकिन अभी भी क्रेडिट की बारीकियों को पूरी तरह से नहीं समझ पाए हैं। 98% लोग जानते थे कि क्रेडिट स्कोर क्या होता है, लेकिन सिर्फ 7% ही पूरी तरह से समझते थे कि यह उनके लोन अप्रूवल और प्राइसिंग को कैसे प्रभावित करता है।

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