कर्ज के महासागर में डूबा पाकिस्तान, इंटरनेशनल एयरलाइन बेचने की नौबत

Pakistan International Airlines: पाकिस्तान ने सरकारी विमानन कंपनी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। सरकार को बोली की रकम का सिर्फ 7.5% हिस्सा कैश में मिलेगा। वहीं 92.5% हिस्सा PIA में फिर से निवेश किया जाएगा, ताकि इसे दोबारा शुरू किया जा सके।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड18 Dec 2025, 03:57 PM IST
Pakistan International Airlines: इस्लामाबाद में 23 दिसंबर को PIA की बोली लगेगी।
Pakistan International Airlines: इस्लामाबाद में 23 दिसंबर को PIA की बोली लगेगी।

Pakistan International Airlines: पाकिस्तान की सरकार ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (Pakistan International Airlines - PIA) को पूरी तरह से बेचने का मन बना लिया है। लगातार घाटा, भारी कर्ज, राजनीतिक दखल और IMF दबाव के चलते सरकार ने 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया है। 23 दिसंबर को इस्लामाबाद में बोली लगाई जाएगी। इसमें बड़े कारोबारी समूह शामिल होंगे। नीलामी के शुरुआती चरण में पाकिस्तान की इस सरकारी एयरलाइन कंपनी की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए बोली लगाई जाएगी।

नीलामी के अगले और दूसरे चरण में सफल बोली लगाने वाले व्यक्ति/फर्म को एक महीने के भीतर बाकी 25 फीदी हिस्सेदारी खरीदने का विकल्प दिया जाएगा। इसके लिए, उन्हें 12 फीसदी का प्रीमियम भी देना होगा। ये अतिरिक्त 12 फीसी प्रीमियम इसलिए लिया जाएगा क्योंकि खरीदार को तत्काल भुगतान के बजाय एक साल तक भुगतान टालने की अनुमति दी जाएगी। प्राइवेटाइजेशन कमीशन के अधिकारियों ने कहा कि सरकार को बोली राशि का सिर्फ 7.5 फीसदी नकद मिलेगा, जबकि 92.5 फीसदी रकम सीधे पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस में निवेश की जाएगी, ताकि कंपनी को दोबारा शुरू किया जा सके।

बोली लगाने वालों में कौन-कौन शामिल?

NDTV की रिपोर्ट में द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार के हवाले से कहा गया है कि कि पाकिस्तान सरकार PIA में अपना 100 फीसदी शेयर बेच रही है। इसकी वजह ये है कि बोली लगाने वाले चाहते थे कि डील के बाद PIA में सरकार की कोई भूमिका न हो। बोली लगाने वालों में लकी सीमेंट कंसोर्टियम, आरिफ हबीब कंसोर्टियम, फौजी फाउंडेशन के मालिकाना हक वाली फौजी फर्टिलाइजर और एयर ब्लू जैसे बड़े बिजनेस ग्रुप शामिल हैं।

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एयरलाइन कंपनी को नए विमानों की जरूरत

PIA के प्राइवेटाइजेशन को लेकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार मुहम्मद अली ने इस फैसले की पुष्टि की है। मुहम्मद अली ने बताया की नीलामी में शामिल होने वाले सभी बोलीदाता फैसले लेने में आसानी के लिए एयरलाइन कंपनी में कम से कम 75 फीसदी हिस्सेदारी चाहते थे, जबकि कुछ ने 100 फसदी हिस्सेदारी की मांग रखी। अली ने कहा कि सरकार का पहला मकसद पीआईए को फिर से खड़ा करना और उसे उसकी पुरानी प्रतिष्ठा वापस लाना है। इसके लिए फ्लीट के आधुनिकीकरण और नए विमानों की खरीद में भारी निवेश की जरूरत होगी।

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PIA को संभालने में इतनी मुश्किल क्यों?

मुहम्मद अली के अनुसार, PIA को दोबारा खड़ा करने के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी। एयरलाइन के पास कुल 34 विमान हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 18 ही उड़ान के काबिल हैं। नए मालिक को पुराने जहाज हटाने, नए विमान लाने और संचालन सुधारने में बड़ी रकम लगानी पड़ेगी। PIA पर कभी करीब PKR 654 अरब का कर्ज था, जिसने किसी भी निवेशक को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। सरकार ने इस कर्ज को एक अलग होल्डिंग कंपनी में डाल दिया, जिससे PIA की हालत कागजों पर सुधरी है। अब PIA के पास करीब PKR 30 अरब की पॉजिटिव इक्विटी बताई जा रही है। हालांकि, नए मालिक को अब भी करीब PKR 26 अरब के टैक्स और एयरपोर्ट शुल्क चुकाने होंगे।

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