
Pet Care Industry: भारत में पालतू पशुओं की देखभाल का एक नया मार्केट तेजी से फैल रहा है। आज के समय में पालतू जानवरों को घरों में परिवार के सदस्य की तरह प्यार और देखभाल की जा रही है। यही वजह है कि देश में "पेट पैरेंट्स" (pet parents) की संख् तेजी से बढ़ रही है। यह बदलाव सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के खरीदारी करने के तरीके, खर्च करने की आदत और अपने पालतू जानवरों की भलाई को प्राथमिकता देने में भी साफ दिखाई देता है।
IBEF (India Brand Equity Foundation) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का pet care क्षेत्र लगभग 20% की दर से बढ़ रहा है। इसके पीछे बढ़ती आय, शहरी जीवनशैली और पालतू जानवरों की सेहत पर बढ़ता ध्यान मुख्य कारण हैं। Flipkart पर भी यह बदलाव साफ नजर आ रहा है। यहां pet care श्रेणी में 50% से अधिक सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। अब लोग कुत्तों और बिल्लियों के अलावा मछलियों, पक्षियों और अन्य पालतू जानवरों के लिए भी रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर विशेष और प्रीमियम उत्पाद तक फ्लिपकार्ट (Flipkart) के जरिए खरीद रहे हैं।
अब पालतू जानवरों की देखभाल केवल खाने और साफ-सफाई तक सीमित नहीं रही। इसमें अब पोषण, साज-संवार, स्वास्थ्य और मनोरंजन से जुड़ी चीजें भी शामिल हो गई हैं। इस बदलाव को नई पीढ़ी के pet parents आगे बढ़ा रहे हैं। आज Flipkart पर Gen Z और millennials मिलकर कुल मांग का 80% से अधिक है। ये उपभोक्ता ज्यादा जागरूक हैं और अपने पालतू जानवरों के लिए बेहतर और सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं।
बेंगलुरु, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहर पेट केयर (pet care) उत्पादों की मांग के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। इन शहरों से कुल ऑर्डर का 10% योगदान है। वहीं मैसूर, देहरादून और कटक जैसे गैर मेट्रो शहरों में भी पालतू जानवर रखने का चलन का तेजी से बढ़ा है। इन गैर मेट्रो शहरों से भी पेट के लिए ऑर्डर की मांग में इजाफा हुआ है।
इस बदलाव का केंद्र बेहतर पोषण है। लोग अब साफ सामग्री वाले (clean-label), नस्ल-विशेष (breed-specific) और पोषक तत्वों से समृद्ध (fortified) सामान खरीद रहे हैं। ऐसे उत्पादों की मांग में 40% से अधिक वृद्धि देखी गई है, क्योंकि लोग अपने पालतू जानवरों के लिए ज्यादा स्वस्थ और उनकी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनना चाहते हैं। इसके साथ ही, रोकथाम आधारित देखभाल (preventive care) भी अब रोज़मर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
अब पेट ओनर्स अपने जानवरों की ग्रूमिंग और स्वास्थ्य पर भी उतना ही ध्यान दे रहे हैं जितना खुद पर देते हैं। बेंगलुरु, गुरुग्राम और मुंबई में कई पेट स्पा, ग्रूमिंग सेंटर्स और वेट क्लीनिक तेजी से खुल रहे हैं। पेट हेयरकट, मसाज, नेल ट्रिमिंग और एरोमा बाथ जैसी सेवाएं अब आम हो चुकी हैं। वहीं, पेट हेल्थकेयर सेक्टर में टीकाकरण, सर्जरी, और डायग्नोस्टिक सेवाओं की मांग बढ़ी है।
खेलने के तरीके में भी बदलाव आ रहा है। Chew toys, chase toys, training aids, collars और interactive accessories जैसे उत्पादों की मांग में सालाना 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे पता चलता है कि लोग अपने पालतू जानवरों को सक्रिय और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने पर भी ध्यान दे रहे हैं। इसके अलावा, पालतू जानवर अब लोगों के उत्सवों और रोज़मर्रा के खास पलों का भी हिस्सा बन रहे हैं। यही कारण है कि accessories, कपड़े (apparel) और खास मौकों से जुड़े उत्पादों की खरीद में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
भारत में पालतू जानवरों के प्रति लोगों का नजरिया बदल चुका है। पहले जहां इन्हें सिर्फ पहरेदारी या मनोरंजन के लिए रखा जाता था, अब ये परिवार के सदस्य बन चुके हैं। यही वजह है कि पेट केयर इंडस्ट्री अब सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और संवेदनशील बाजार बन गई है। पेट फूड से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक, यह सेक्टर न सिर्फ रोजगार दे रहा है बल्कि देश में ‘एनिमल वेलफेयर’ की सोच को भी मजबूत कर रहा है। आने वाले वर्षों में भारत का पेट केयर बिजनेस न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा, बल्कि यह इंसान और जानवर के रिश्ते को और भी गहराई से जोड़ देगा।
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