सोना और चांदी ने हाल ही में अपने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह सिर्फ निवेशकों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी बड़ी खबर है। अमेरिकी अर्थशास्त्री और गोल्ड विशेषज्ञ पीटर शिफ ने चेतावनी दी है कि यह उछाल समृद्धि का संकेत नहीं बल्कि आर्थिक तनाव की ओर इशारा कर रहा है। शिफ के अनुसार, सोना अब $5,085 प्रति औंस (लगभग ₹4,55,000 प्रति 10 ग्राम) के ऊपर ट्रेड कर रहा है। जबकि चांदी $108.25 (लगभग ₹9,700 प्रति औंस) तक पहुंच गई है। उनका कहना है कि यह सिर्फ मार्केट मूवमेंट या स्पेकुलेशन नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि वैश्विक और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में छुपा संकट अब सतह पर आने वाला है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी उठाए सवाल
शिफ ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ताकत को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था मानते हैं, लेकिन वित्तीय बाजार इसका उल्टा संदेश दे रहे हैं। डॉलर कमजोर हो रहा है, सोना और चांदी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे निवेशकों में अमेरिकी मौद्रिक स्थिरता को लेकर भरोसे की कमी दिख रही है। खासकर डॉलर का स्विस फ्रैंक के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरना इस बात को और मजबूत करता है।
लगातार चढ़ रहा सोना-चांदी के दाम
सोने और चांदी में यह तेजी मुख्य रूप से निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की सुरक्षित संपत्ति की ओर बढ़ती दिलचस्पी की वजह से है। सोमवार को सोना ₹4,58,000 प्रति 10 ग्राम को पार कर गया और चांदी ₹10,200 प्रति औंस तक पहुंच गई। निवेशक इसे सुरक्षित विकल्प के रूप में खरीद रहे हैं क्योंकि वैश्विक राजनीतिक तनाव, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और नीति अनिश्चितता ने शेयर और अन्य मार्केट्स को अस्थिर बना दिया है।
2008 के संकट की चेतावनी पहले दी थी
पीटर शिफ के अनुसार, बढ़ता कर्ज, लगातार घाटा और केंद्रीय बैंकों की मुद्रा सृजन नीतियां मुद्राओं को कमजोर करती हैं और बाजार को अस्थिर बनाती हैं। वह लंबे समय से सोना और चांदी को मुद्रास्फीति और आर्थिक अस्थिरता से बचाव का जरिया मानते हैं। शिफ ने पहले भी 2008 के वित्तीय संकट की चेतावनी समय रहते दी थी। उनके अनुसार, डॉलर में कमजोरी, सोने-चांदी में तेजी और बॉन्ड की कीमतों में गिरावट एक साथ मिलकर वैश्विक आर्थिक संकट का संकेत दे रहे हैं।