नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले शुल्क की नई दरें जारी कर दी हैं। ये संशोधित दरें 16 जुलाई से लागू होंगी और अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगी। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और घरेलू जरूरतों को देखते हुए इन दरों की समीक्षा करती है।
नई अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर 2.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया जाएगा। वहीं, डीजल के निर्यात पर यह दर 15.5 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर 14.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क देना होगा।
हालांकि, सरकार ने राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (Road and Infrastructure Cess) को शून्य रखा है। इसका मतलब है कि इस मद में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि देश के भीतर इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर फिलहाल एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी आम लोगों को घरेलू स्तर पर मिलने वाले ईंधन पर पहले जैसी ही एक्साइज ड्यूटी लागू रहेगी।
दरअसल, इस साल मार्च में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिला था। ऐसे समय में भारत सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। इसी उद्देश्य से 27 मार्च 2026 से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और अन्य संबंधित शुल्क लागू किए गए थे।
सरकार इन शुल्क दरों की समीक्षा हर 15 दिन में करती है। इस प्रक्रिया के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों का आकलन किया जाता है। उसी के आधार पर नई दरें तय की जाती हैं ताकि घरेलू बाजार और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
इससे पहले इन शुल्क दरों में संशोधन 1 जुलाई से लागू किया गया था। अब 16 जुलाई से नई दरें प्रभावी होंगी और अगले पखवाड़े तक यही व्यवस्था लागू रहेगी। इसके बाद फिर से अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति का आकलन कर जरूरत के अनुसार नई दरों की घोषणा की जा सकती है।