
US India Trade Deal News: अमेरिका से ट्रेड डील में भारत को अपने किसी भी पड़ोसी देश के मुकाबले ज्यादा तरजीह मिली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया कि भारत ने दुनिया के सबसे बड़े बाजार के साथ जो समझौता हासिल किया है, वह अमेरिका के साथ 'हमारे पड़ोसी और प्रतिस्पर्धी देशों के समझौतों की तुलना में बहुत अच्छा है।'
वाणिज्य मंत्री ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण और हस्तशिल्प जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों के लिए 'ढेर सारे अवसर' खोलने वाला है। उन्होंने कहा कि अब भारत और अमेरिका के अधिकारी समझौते के तकनीकी विवरणों को अंतिम रूप देंगे। फिर ब्योरा तय हो जाने पर दोनों पक्ष एक संयुक्त बयान जारी करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर दोनों देशों का संयुक्त बयान जल्द ही जारी होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और बातचीत के बाद ट्रेड डील की घोषणा कर दी। विपक्ष का कहना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत के हितों की अनदेखी की गई है, खासकर देश के किसानों और पशुपालकों के लिए यह नुकसानदायक साबित होगा। हालांकि, वाणिज्य मंत्री ने कहा कि इसमें 'कृषि एवं पशुपालन जैसे क्षेत्रों में देश के संवेदनशील हितों की पूरी तरह रक्षा की गई है।' उन्होंने कहा कि उन्हें मिल रही रिपोर्टों के अनुसार इस समझौते को लेकर हर क्षेत्र में उल्लास है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील से भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए बड़े अवसर खुलने जा रहे हैं। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि इसकी बढ़ती जरूरतों के लिए डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, एआई जैसी हाई टेक्नॉलजी के क्षेत्रों के लिए उपकरण और कोकिंग कोल तथा अन्य जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति में सुविधा होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के 500 अरब डॉलर के जिस आयात की बात की है, वह पांच साल का लक्ष्य है।
गोयल ने संसद में हंगामे का हवाला देकर कहा कि विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘हम इस समझौते के बारे में यह बयान संसद में देना चाहते थे, लेकिन आज वहां विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के दलों ने जो भद्दा दृश्य उत्पन्न किया वह घोर निंदनीय है। इसी कारण हम इस वक्तव्य के लिए यहां (मीडिया के समक्ष) आए हैं।’
वाणिज्य मंत्री ने कांग्रेस पर दोहरा चरित्र दिखाने का आरोप लगाया और कहा, 'वे अभी कुछ दिन पहले तक पूछ रहे थे कि अमेरिका के साथ समझौता कब तक होगा, अब वे इस समझौते के बारे में निराधार बातें करके जनता को भ्रमित कर रहे हैं।' गोयल ने कहा, 'कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस समझौते को लेकर पूरा झूठ फैलाने में लग गए और देश के लोगों को गुमराह कर रहे हैं।'
उन्होंने राहुल गांधी पर नकारात्मक सोच रखने का आरोप लगाते हुए कहा, '(लोकसभा में) विपक्ष के नेता देश को झूठ और फरेब के नाम पर भ्रमित करना चाह हरे हैं। उन्हें देश के विकास में कोई दिलचस्पी नहीं है। संप्रग के कार्यकाल में विकास रुक गया था, देश पांच प्रमुख कमजोर (फ्रेजाइल फाइव) अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाने लगा था, महंगाई चरम पर थी। क्या वह चाहते हैं कि भारत एक बार फिर उसी दौर में पहुंच जाए?'
उन्होंने समझौते की घोषणा पहले ट्रंप की ओर से किए जाने के बारे में कहा, 'भारत पर 50 प्रतिशत का शुल्क अमेरिका ने लगाया था, इसे कम करने की घोषणा उन्हें ही करनी थी।' वाणिज्य मंत्री ने कहा कि विभिन्न जटिल विषयों और समस्याओं को सुलझाने के लिए महीनों तक चली बातचीत के बाद यह समझौता पीएम मोदी के नेतृत्व के चलते संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार में 50 प्रतिशत के ऊंचे शुल्क के चलते हमारे किसान, मछुआरे, कपड़ा और परिधान बनाने वाले दिक्कत में आ गए थे। गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री भारत के किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के हितों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे।
गोयल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा, 'कांग्रेस ने 2011-12 में भारत को चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते के चक्कर में फंसा दिया था। मोदी ने ही अपने किसानों, पशुपालकों की अपनी लगातार चिंताओं के चलते, उनके हितों की रक्षा के लिए क्षेत्रीय वृहद आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते से भारत को अलग कर लिया।'
उन्होंने दोहराया कि अमेरिका के साथ हुए समझौते में संवेदनीशल क्षेत्रों का संरक्षण किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोयल के साथ वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी थे। गोयल ने इस वक्तव्य पर मीडिया का कोई सवाल नहीं लिया।
उधर, वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि भारत डाटा सेंटर का वैश्विक केंद्र बनने जा रहा है। इसके लिए सैकड़ों अरब डॉलर के अत्याधुनिक उपकरण और प्रौद्योगिकी की जरूरत होगी। इसके लिए ऊर्जा की जरूरत को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा की क्षमता का भी विस्तार करना होगा। अमेरिका के साथ समझौता इस दिशा में बहुत सहायक हो सकता है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यदि हम अकेले इस्पात क्षेत्र में 2030-31 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन क्षमता हासिल करना चाहते हैं तो हमें सालाना 15 अरब डॉलर के कोकिंग कोल के आयात की जरूरत पड़ सकती है। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि नया समझौता भारत और अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर के सालाना द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्यों के विस्तार में सहायक होगा। ऐसे में पांच साल में वहां से 500 अरब डॉलर का आयात कोई ऐसी बात नहीं है जिस पर आश्चर्य किया जाए।
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