ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुआ था पोलैंड का ड्रोन? अब भारत के साथ रक्षा साझेदारी बढ़ाने पर बातचीत तेज

India-Poland Defence Cooperation: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सैन्य क्षमता ने दुनिया का ध्यान खींचा है। अब पोलैंड भारत के साथ खासकर ड्रोन तकनीक में संयुक्त रक्षा उत्पादन बढ़ाने का इच्छुक है। दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड7 Mar 2026, 08:55 PM IST
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क (R) और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 अगस्त, 2024 को पोलैंड के वारसॉ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए। (फाइल फोटो)
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क (R) और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 अगस्त, 2024 को पोलैंड के वारसॉ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए। (फाइल फोटो)(AFP)

India-Poland Defence Cooperation: मई 2025 में भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि इसकी गूंज अब अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारियों तक पहुंच रही है। इस ऑपरेशन के बाद कई देशों की नजर भारत की सैन्य क्षमता और तकनीकी ताकत पर गई है। इसी कड़ी में अब पोलैंड ने भी भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। खास तौर पर उन्नत ड्रोन तकनीक और संयुक्त रक्षा उत्पादन को लेकर पोलैंड काफी उत्साहित नजर आ रहा है।

भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की तैयारी

पोलैंड के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि उनका देश भारत के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। खास तौर पर एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं हैं। आर्थिक विकास और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अवर सचिव मिखाल बारानोव्स्की ने कहा कि पोलैंड के पास दुनिया के कुछ बेहतरीन ड्रोन मौजूद हैं। इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी के साथ-साथ विस्फोटक मिशनों के लिए भी किया जा सकता है।

ड्रोन टेक्नोलॉजी पर बातचीत

जब उनसे पूछा गया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पोलैंड ने भारत के साथ क्या साझा किया था, तो बारानोव्स्की ने कहा कि यह ऐसी तकनीकी क्षमताएं हैं जिन्हें पोलैंड भारत के साथ साझा कर सकता है और पहले भी कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सहयोग आगे और बढ़ सकता है और भविष्य में दोनों देश इस क्षेत्र में और गहराई से काम कर सकते हैं।

भारत को लेकर पोलैंड के विचार

बारानोव्स्की ने साफ कहा कि पोलैंड भारत को सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं मानता। उनके मुताबिक, पोलैंड भारत को एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। इसी सोच के साथ दोनों देश संयुक्त उद्यम के जरिए रक्षा उत्पादन बढ़ा सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच जॉइंट प्रोडक्शन को लेकर और प्रगति देखने को मिल सकती है।

पोलैंड की एक बड़ी रक्षा कंपनी पहले से ही भारत में सक्रिय है। डब्ल्यूबी समूह अपनी सहायक कंपनी डब्ल्यूबी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जरिए भारत में ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। यह पहल भारत के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत रक्षा उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किया गया था पोलैंड का ड्रोन?

भारत ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद नौ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इन ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन के जरिए सटीक हमले किए गए थे। पोलैंड के एक अधिकारी के मुताबिक इस अभियान के दौरान आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करने में पोलैंड के ड्रोन की भी भूमिका रही थी।

पीएम मोदी की पोलैंड यात्रा के बाद स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

बारानोव्स्की ने अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पोलैंड यात्रा का भी जिक्र किया। उस यात्रा के बाद भारत और पोलैंड के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के इस साल के अंत तक भारत आने की संभावना है।

बढ़ेगी ट्रेड और इकॉनमी

बारानोव्स्की ने कहा कि वह जल्द ही एक कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य आर्थिक रिश्तों को मौजूदा “अच्छे स्तर” से आगे बढ़ाकर “बहुत अधिक संभावनाओं वाले स्तर” तक ले जाना है। उन्होंने यह भी बताया कि यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत पूरी हो चुकी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सरकारी स्तर पर सहयोग बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ है।

ईरान-इजरायल तनाव का ऊर्जा बाजार पर हो रहा असर

बारानोव्स्की ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का भी जिक्र किया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर ऊर्जा बाजार पर पहले से दिखने लगा है। गैस और तेल की कीमतों पर इसका प्रभाव नजर आ रहा है। अगर यह तनाव जारी रहता है तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने जल्द से जल्द कूटनीतिक समाधान की जरूरत पर जोर दिया।

बदलती वैश्विक राजनीति में नई रक्षा साझेदारी

दुनिया में तेजी से बदल रहे भू-राजनीतिक हालात के बीच देशों के बीच रक्षा साझेदारी का महत्व और बढ़ गया है। भारत और पोलैंड के बीच बढ़ता सहयोग इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में अगर दोनों देश मिलकर रक्षा उत्पादन और तकनीक पर काम करते हैं, तो इससे न सिर्फ सैन्य क्षमता मजबूत होगी बल्कि रणनीतिक रिश्ते भी नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।

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