भांड़ में जाए अमेरिका, भारत है ना… US पर कुछ इसी अंदाज में भड़कीं UN की अधिकारी, इंडिया की जमकर तारीफ

संयुक्त राष्ट्र ऊर्जा की सह-अध्यक्ष डामिलोला ओगुनबियी का कहना है कि आर्थिक फायदों के कारण स्वच्छ ऊर्जा की क्रांति को अब रोका नहीं जा सकता। उन्होंने भारत को इस बदलाव का अगुवा बताया है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड12 Jan 2026, 04:54 PM IST
संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी डामिलोला ओगुनबियी (फाइल फोटो)
संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी डामिलोला ओगुनबियी (फाइल फोटो)(Wikimedia Commons)

अमेरिका भले ही क्लीन एनर्जी पर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी से बाहर निकल गया हो, लेकिन भारत है ना। भारत ही इस क्षेत्र का लीडर है और उसके नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति की मशाल जलती ही रहेगी। संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी डामिलोला ओगुनबियी के बयान की पड़ताल करें तो कुछ यही लब्बोलुआब निकलता है।

अमेरिका को लताड़ और भारत की भरपूर प्रशंसा

ओगुनबियी ने स्वच्छ ऊर्जा को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। उनका कहना है कि कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत बदलाव होने के बावजूद क्लीन एनर्जी में निवेश कम नहीं होगा। उनका इशारा अमेरिका की तरफ है। उ्न्होंने आगे कहा कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण हरित ऊर्जा का भविष्य सुरक्षित है। ओगुनबियी ने इस बदलाव में भारत की सक्रिय भागीदारी और क्षमता की विशेष प्रशंसा की है।

आर्थिक फायदे दिलाएंगे क्लीन एनर्जी को मजबूती

संयुक्त राष्ट्र-ऊर्जा की सह-अध्यक्ष डामिलोला ओगुनबियी के अनुसार, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में निवेश अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां से पीछे नहीं हटा जा सकता। उन्होंने साफ किया कि जब कोई चीज आर्थिक रूप से फायदेमंद होती है, तो वह हर हाल में आगे बढ़ती है। उनके मुताबिक, वैश्विक स्तर पर ग्रीन ट्रांजेक्शन के पक्ष में मजबूत आर्थिक आधार मौजूद हैं, जो इसे गति देते रहेंगे।

वैश्विक चुनौतियों के बीच ग्लोबल साउथ पर फोकस

ओगुनबियी की यह टिप्पणी अमेरिका के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें उसने संयुक्त राष्ट्र-ऊर्जा सहित 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और जलवायु संधि से हटने का निर्णय लिया है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम लेकर सीधी टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि वैश्विक प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने का प्रभाव पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि अब संगठन का पूरा ध्यान ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) पर है, जो मौजूदा माहौल में और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

विकासशील देशों के लिए स्थानीय वित्तीय मॉडल की जरूरत

ओगुनबियी ने जोर देकर कहा कि विकासशील देशों को अब पुराने वैश्विक टेम्पलेट्स की जरूरत नहीं है। इसके बजाय इन देशों को अपनी स्थानीय बाजार की जरूरतों के हिसाब से नए फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की जरूरत है। उन्होंने फाइनेंशियल इनोवेशन में तेजी लाने का आह्वान किया ताकि एनर्जी ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके।

क्लाइमेट एक्शन पर भारत की पहलों की सराहना

भारत की तारीफ करते हुए ओगुनबियी ने कहा कि भारत जलवायु कार्रवाई और विकास के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत ने ग्लोबल साउथ के अन्य देशों की मदद के लिए काफी काम किया है। भारत का पूरा ध्यान नतीजों को जमीन पर उतारने और उन्हें मापने पर रहता है, जो उसे अन्य देशों से अलग बनाता है। उन्होंने केन्या और नाइजीरिया जैसे देशों के साथ भारत के सहयोग को एक सकारात्मक उदाहरण बताया।

एनटीपीसी और संयुक्त राष्ट्र के बीच अहम समझौता

भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC) ने संयुक्त राष्ट्र-ऊर्जा के साथ एक खास समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत कंपनी के लिए ऊर्जा ट्रांजेक्शन का एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा। यह कदम वैश्विक संस्थानों के साथ भारत के गहरे जुड़ाव को दिखाता है। भारत में एनर्जी एफिसिएंसी पर खास काम हो रहा है, जो बढ़ती जरूरतों को पूरा करने का सबसे सस्ता और तेज तरीका है।

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