RBI Directions: ऐसा कई बार होता है कि ग्राहक अपने काम के लिए बार-बार बैंक जाते है, लेकिन उसकी बात को ठीक से सुना नहीं जाता है। कई बार तो बैंक कर्मचारी भी ग्राहकों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के भीतर ग्राहकों की शिकायतों को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
RBI ने समाधान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों और एनबीएफसी में आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति और कामकाज के लिए दिशानिर्देश जा कर दिए हैं। इन निर्देशों का मकसद विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities - REs) के भीतर ही शिकायतों के समाधान सिस्टम को मजबूत करना और ग्राहकों की समस्याओं को फौरन समाधान करना है।
किन संस्थानों पर लागू होंगे नियम?
आरबीआई की ओर से जारी ये निर्देश कई तरह की वित्तीय संस्थाओं के लिए अलग-अलग नियम जारी किए हैं। इस दायरे में ये संस्थाएं आएंगी।
1. वाणिज्यिक बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक
2. पेमेंट्स बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs)
3. गैर-बैंक प्रीपेड भुगतान उपकरण (PPI) जारीकर्ता
4. क्रेडिट सूचना कंपनियां (CICs)
कौन बनेगा आंतरिक लोकपाल?
आंतरिक लोकपाल एक सेवानिवृत्त अधिकारी होना चाहिए या एक सेवारत अधिकारी, जिसका पद संबंधित संस्था (आरई) के 'जनरल मैनेजर' (जीएम) के समकक्ष हो। अनुभव की बात करें तो उम्मीदवार के पास बैंकिंग, गैर-बैंक वित्त, विनियमन, पर्यवेक्षण, भुगतान और निपटान प्रणाली, क्रेडिट सूचना या उपभोक्ता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करने का कम से कम 7 साल का अनुभव होना चाहिए।
आंतरिक लोकपाल कैसे करेगा काम?
RBI की गाइडलाइन में कहा गया है कि आंतरिक लोकपाल का कार्यालय सीधे शिकायतकर्ताओं या जनता के सदस्यों से प्राप्त शिकायतों को नहीं संभालेगा। उसे उन शिकायतों पर कार्रवाई करनी चाहिए, जिनकी विनियमित संस्था पहले ही जांच कर चुकी है। ये समस्याएं 'आंशिक रूप से हल' हुई हैं या संस्था की ओर से 'पूरी तरह खारिज' कर दी गई हैं। इस प्रकार, यह संस्था के भीतर एक टॉप लेवल के रिव्यू अथॉरिटी के तौर पर काम करेगा।