Real Estate: दिल्ली-मुंबई में घर खरीदारों ने खींचे हाथ, जानें क्यों सुस्त पड़ा रियल एस्टेट मार्केट

Real Estate: देश के बड़े शहरों में घरों की बिक्री थोड़ी धीमी पड़ी है। महंगे दाम और वैश्विक तनाव के कारण लोग खरीदारी में सतर्क हो गए हैं। कुछ शहरों में बढ़त जरूर दिखी, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में अब पहले जैसी तेजी नहीं दिख रही।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड7 Apr 2026, 03:10 PM IST
घर खरीदना हुआ महंगा, बिक्री में आई गिरावट
घर खरीदना हुआ महंगा, बिक्री में आई गिरावट

Real Estate: इस साल की शुरुआत में ही प्रॉपर्टी मार्केट की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ती नजर आई है। जहां पहले लोग तेजी से घर खरीद रहे थे, वहीं अब महंगी कीमतें और वैश्विक हालात ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

नतीजा ये हुआ कि देश के बड़े शहरों में घरों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि कुछ शहरों में अभी भी हल्की-फुल्की तेजी बनी हुई है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में अब पहले जैसी चमक नहीं दिख रही।

4% की गिरावट दर्ज

जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान देश के आठ बड़े शहरों में कुल 84,827 घर बिके, जो पिछले साल इसी समय 88,361 यूनिट थे। कुल मिलाकर करीब 4% की गिरावट देखने को मिली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, महंगे घर और पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव इस गिरावट की बड़ी वजह बने हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

किन शहरों में कम हुई घरों की बिक्री

अगर शहरों की बात करें तो मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और पुणे जैसे बड़े बाजारों में बिक्री में गिरावट आई है।

मुंबई में बिक्री 7% घटकर 23,185 यूनिट रह गई। वहीं दिल्ली-एनसीआर में 11% की गिरावट के साथ 12,734 यूनिट और पुणे में भी 11% गिरावट के साथ 12,711 यूनिट की बिक्री दर्ज हुई।

बेंगलुरु से कोलकाता तक, अभी भी घरों की डिमांड

दूसरी तरफ बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद और कोलकाता जैसे शहरों में हल्की बढ़त देखने को मिली। बेंगलुरु में आवासीय बिक्री 5 प्रतिशत बढ़कर 13,092 इकाई हो गई। हैदराबाद में 1 प्रतिशत बढ़कर 9,541 इकाई और चेन्नई में 9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,763 इकाई हो गई। अहमदाबाद में बिक्री 2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4,758 इकाई और कोलकाता में 5 प्रतिशत बढ़कर 4,043 इकाई रही।

आखिर क्यों घट रही है डिमांड, एक्सपर्ट से जानें

नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतरराष्ट्रीय साझेदार, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल का कहना है कि बाजार में आई ये नरमी अचानक नहीं है। पिछले कुछ सालों में लगातार तेजी के बाद अब थोड़ी स्थिरता आना स्वाभाविक है।

हालांकि उन्होंने ये भी साफ कहा कि लगातार बढ़ती कीमतें और बिक्री में कमी इस बात का संकेत हैं कि लोगों की खरीदने की क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही वैश्विक तनाव भी लोगों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है।

सप्लाई भी घटी

सिर्फ बिक्री ही नहीं, बल्कि नए घरों की सप्लाई में भी कमी आई है। इस तिमाही में नई आवासीय सप्लाई 2% घटकर 94,855 यूनिट रह गई। इसका मतलब है कि डेवलपर्स भी अब थोड़ा संभलकर कदम उठा रहे हैं और बाजार की स्थिति को देखते हुए नई लॉन्चिंग पर फोकस कम कर रहे हैं।

फिलहाल प्रॉपर्टी मार्केट एक तरह के संतुलन की स्थिति में दिख रहा है। न तो पूरी तरह तेजी है, न ही बड़ी गिरावट। आने वाले समय में अगर कीमतों में थोड़ी नरमी आती है और वैश्विक हालात सुधरते हैं, तो बाजार फिर से पटरी पर लौट सकता है। लेकिन अभी के लिए खरीदार और बिल्डर दोनों ही थोड़ा इंतजार और समझदारी से फैसले लेते नजर आ रहे हैं।

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