2025 में रिकॉर्ड कृषि उत्पादन, किसानों को बंपर पैदावार के बाद नीतिगत सुधार का इंतजार

दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से अधिक रहने से खरीफ की बुवाई को बढ़ावा मिला। कृषि मंत्रालय के प्राथमिक अग्रिम अनुमान के अनुसार 2025-26 के लिए खरीफ खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 17.333 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो 2024-25 में 16.94 करोड़ टन था।

Shivam Shukla( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड29 Dec 2025, 01:33 PM IST
2025 में रिकॉर्ड कृषि उत्पादन, किसानों को बंपर पैदावार के बाद नीतिगत सुधार का इंतजार
2025 में रिकॉर्ड कृषि उत्पादन, किसानों को बंपर पैदावार के बाद नीतिगत सुधार का इंतजार

Agricultural Production in 2025: अमेरिकी टैरिफ से एग्री एक्सपोर्ट में अड़चनों के बावजूद भारत के एग्री सेक्टर ने 2025 का समापन पिछले साल के 35.773 करोड़ टन (एमटी) से ज्यादा रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन के अनुमान के साथ किया। वहीं, GST सुधारों ने कच्चे माल की लागत में राहत दी। हितधारक अब नए साल में महत्वपूर्ण बीज और कीटनाशक बिल के पास होने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस साल मजबूती और कमजोरी दोनों देखने को मिली। माल एवं सेवा कर (GST) की दरों में कटौती से लागत में काफी बचत हुई, जबकि अमेरिकी टैरिफ ने बाजार में विविधता लाने के लिए मजबूर किया।

अधिक बारिश से बुवाई को मिला बढ़ावा

कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा, ‘हमें उम्मीद है कि हम इस साल 2025-26 (जुलाई-जून) में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन हासिल करेंगे। खरीफ की पैदावार सकारात्मक बनी हुई है और रबी की बुवाई अच्छी तरह से जारी है।’’

दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से अधिक रहने से खरीफ की बुवाई को बढ़ावा मिला। कृषि मंत्रालय के प्राथमिक अग्रिम अनुमान के अनुसार 2025-26 के लिए खरीफ खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 17.333 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो 2024-25 में 16.94 करोड़ टन था।

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इन क्षेत्रों का हुआ नुकसान

चावल का उत्पादन 12.45 करोड़ टन से ज्यादा होने का अनुमान है, जबकि मक्का का उत्पादन 2.83 करोड़ टन रहने का अनुमान है। हालांकि सितंबर में हुई अत्यधिक बारिश ने पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

रबी की बुवाई 19 दिसंबर तक 659.39 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले आठ लाख हेक्टेयर ज्यादा है। गेहूं की बुवाई 300.34 लाख हेक्टेयर से 301.63 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि दालों की बुवाई 123.02 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 126.74 लाख हेक्टेयर में की गई।

उत्पादन में हुई प्रगति के बावजूद सरकारी शोध संस्थान नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने आधार प्रभाव का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि का अनुमान चार प्रतिशत लगाया है, जो पहले के 4.6 प्रतिशत से कम है।

रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन और किसानों की कमाई के बीच असंतुलन से फरवरी में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने पंजाब-हरियाणा सीमा पर लगातार विरोध प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में स्वामीनाथन सूत्र पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, ऋण माफी और पेंशन की मांगें रखी गईं।

मार्च में पुलिस ने इन शिविरों को खाली कराया जिससे किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की 123 दिन की भूख हड़ताल समाप्त हुई। बाद में किसान संगठनों ने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और बीज विधेयकों के मसौदे के खिलाफ रैलियां निकालीं।

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नीतिगत दिशा में जोर जारी है

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.37 लाख करोड़ रुपये के बढ़े हुए बजट के साथ, कृषि मंत्रालय ने उच्च उत्पादकता, कम लागत, फसल विविधीकरण, मूल्यवर्धन और प्रत्यक्ष सहायता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया है।

सरकार के पहले मंत्रिमंडल निर्णय के अनुसार, एक जनवरी को पीएम फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा को 2025-26 तक बढ़ाया गया (69,516 करोड़ रुपये का परिव्यय) तथा डीएपी उर्वरक सब्सिडी में 3,500 रुपये प्रति टन की वृद्धि की गई। इस प्रकार कृषि केंद्रित पहले मंत्रिमंडल निर्णयों की तीन साल की परंपरा को बरकरार रखा गया।

प्रमुख पहलों में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (35,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जिसका लक्ष्य 100 कम उत्पादकता वाले जिले और 1.7 करोड़ किसान हैं), 11440 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय दलहन मिशन, रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि और संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना का निरंतर संचालन शामिल हैं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 3.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है जिसकी 21वीं किस्त नवंबर में वितरित की गई। इससे नौ करोड़ किसानों को सहायता मिली।

इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट 2.0 की शुरुआती परियोजना राजस्थान और तमिलनाडु की चुनिंदा मंडियों में स्वचालित बोली और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ शुरू किया गया था लेकिन तकनीकी समस्याओं को जनवरी के मध्य तक ठीक किया जाना बाकी है।

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