
मुंबई: भारत के निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी और दुनिया के सबसे पुराने एयरो इंजन निर्माता रोल्स रॉयस ने मिलकर लड़ाकू विमानों के लिए इंजन बनाने की रणनीतिक मंशा जताई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने शुक्रवार शाम एक प्रेस रिलीज के जरिए इसकी जानकारी दी।
दूसरी तरफ, ब्रिटिश कंपनी रोल्स रॉयस ने भी लंदन से जारी अपनी प्रेस रिलीज में इसी की घोषणा की। ध्यान रहे कि अभी दोनों कंपनियों ने साझेदारी का इरादा जताया है, दोनों के बीच कोई कॉन्ट्रैक्ट हुआ नहीं है। अगर दोनों कंपनियां आगे बढ़कर इंजन बनाने लगीं तो यह भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स के लिए AMCA इंजनों की जरूरत पूरा होने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और रोल्स-रॉयस की ओर से जारी संयुक्त बयान कहता है, 'रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और रॉल्स-रॉयस ने आज भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम के लिए एक स्वदेशी कॉम्बैट इंजन के डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और डिलीवरी के लिए पार्टनरशिप करने और अपनी क्षमताएं उपलब्ध कराने के अपने रणनीतिक इरादे की घोषणा की।'
इसमें आगे कहा गया है, 'इस साझेदारी के तहत, रिलायंस और रोल्स रॉयस एक खास एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स बनाने की संभावनाओं पर विचार करेंगे, जो भारत में पावर और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी के लिए एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' होगा। यह साझेदारी भारत में AMCA इंजन के संयुक्त विकास के लिए एक बेहतरीन प्रस्ताव पेश करेगी, जिसमें दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी और औद्योगिक क्षमताएं एक साथ आएंगी।'
जैसा कि बयान में कहा गया है एएमसीए कॉम्बैट इंजन की डिजाइनिंग से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और डिलिवरी तक, सारे काम भारत में संपन्न होंगे। इसके लिए एक विशाल परिसर का निर्माण किया जाएगा जिसमें रिलायंस और रोल्स रॉयस की ओर से इंजन बनाने से जुड़ी हर क्षमता स्थापित की जाएगी।
साझा बयान में कहा गया है कि दोनों कंपनियों का प्रयास भारत को आत्मनिर्भर बनाने के पीएम मोदी के प्रयासों को उड़ान देगा। बयान में कहा गया, 'यह कदम भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को साकार करने की दिशा में एक पहल है, जिसके तहत देश के फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए स्वदेशी इंजन तैयार करके भारत के डिफेंस इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा।'
रिलायंस के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने कहा कि रिलायंस और रोल्स रॉयस की साझी शक्ति से भारत को एक स्वदेशी एयरो इंजन इकोसिस्टम प्रदान करना है। उन्होंने कहा, ‘भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के लिए जरूरी है कि हमारे पास अहम टेक्नोलॉजी में खुद की क्षमता हो। रोल्स रॉयस के साथ हमारा मकसद एडवांस्ड प्रोपल्शन में उनकी दुनिया की बेहतरीन विशेषज्ञता को रिलायंस की टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, बड़े पैमाने पर काम करने और काम को अंजाम देने की क्षमताओं के साथ मिलाकर भारत में एक स्वदेशी एयरो इंजन इकोसिस्टम बनाना है।’
अभी तक भारत के पास अपना कोई हाई थ्रस्ट फाइटर इंजन नहीं है। हल्के लड़ाकू विमानों के इंजन बनाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से चलाया गया कावेरी प्रोग्राम दशकों से अटका है। वहीं, फ्रांस की एयरो इंजन बनाने वाली कंपनी सफरान (Safran) और डीआरडीओ गैस टर्बाइन रिसर्च इस्टेब्लिशमेंट (GTRE) की बातचीत को सुरक्षा मामलों की मंत्रीमंडलीय समिति (CCS) की मंजूरी मिलनी है। इस बीच रिलायंस और रोल्स रॉयस की यह घोषणा सामने आ गई है।
रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष 2026 में 11,75,919 करोड़ रुपये का समेकित राजस्व इकट्ठा किया था जबकि रोल्स रॉयस ने वित्त वर्ष 2025 में करीब 26 खरब रुपये (20.1 अरब पाउंड) का मूल राजस्व प्राप्त किया था।
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