अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने खाना बनाने वाले गैस एलपीजी का उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए आपातकाल का सायरन बजा दिया है। मोदी सरकार ने कंपनियों से एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने को कहा है ताकि खाड़ी देशों से आपूर्ति बाधित होने के बावजूद देश में एलपीजी की कीमत नियंत्रण में रहे।
अब एलपीजी की महंगाई रोकने की व्यवस्था
पेट्रोल-डीजल पर अमेरिका की तरफ से बड़ी राहत की खबर आई है। अमेरिका ने एक महीने के लिए भारत को रूस से कच्चे तेल खरीदने की छूट दे दी है। ऐसे में भारत सरकार के लिए एलपीजी के संभावित अभाव की ही चिंता है। यही वजह है कि सरकार ने एलपीजी प्रॉडक्शन बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर दिया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट दी है। उधर, पेट्रोल-डीजल के शॉर्टेज की अफवाहों के बीच पेट्रोल कंपनियां लोगों को सचेत करने लगी हैं।
सरकार ने जारी किया आदेश
एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन नाम के दो गैसों का घोल होता है। सरकार ने आपातकालीन अधिकारों को उपयोग करते हुए गुरुवार देर रात आदेश जारी किया। इस सरकारी आदेश में कंपनियों से कहा गया है कि वे अपने पास उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का इस्तेमाल एलपीजी उत्पादन में ही करें। सरकार ने अपने आदेश में कंपनियों को साफ कर दिया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों को पेट्रोकेमिकल प्रॉडक्शन में इस्तेमाल नहीं करें।
एलपीजी आयात में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है। देश में पिछले वर्ष 33.15 लाख मीट्रिक टन एलपीजी की खपत हुई थी। भारत इस खपत का दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है और कुल आयात का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा मिडल ईस्ट से आता है।
भारत में इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के जरिए एलपीजी की बिक्री की जाती है। सरकार ने गैस उत्पादक कंपनियों से कहा कि वे एलपीजी, प्रोपेन और ब्यूटेन को इन इन सरकारी कंपनियों को मुहैया कराए। भारत में अभी 3.32 करोड़ एलपीजी कन्ज्यूमर हैं।