
Retail Inflation: केंद्र सरकार ने पहली बार रिटेल खुदरा महंगाई के आंकड़े नए फॉर्मूल के हिसाब से जारी कर दिए हैं। इस नई सीरीज में साल 2024 के आधार पर कीमतों को रखा गया है। जनवरी 2026 में भारत की रिटेल महंगाई दर बढ़कर 2.75% हो गई। वहीं ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 2.73 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 2.77 प्रतिशत रही है। मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन की ओर से यह डेटा जारी किया गया है।
महंगाई के बढ़ोतरी के बावजूद यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के टारगेट से नीचे हैं। RBI ने महंगाई का टारगेट 4 प्रतिशत रखा है। रिटेल महंगाई के ये नए आंकड़े नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज के तहत जारी किए गए हैं। इससे पहले पुराने सीरीज के अनुसार दिसंबर 2025 में रिटेल महंगाई दर 1.33 फीसदी थी।
12 फरवरी को जारी आंकड़ों के साथ ही एक दशक से अधिक समय बाद रिटेल महंगाई सीरीज में बड़ा बदलाव किया गया है और बेस ईयर 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है। पुरानी सीरीज के मुताबिक महंगाई दर में पिछले साल के अंत से तेजी आनी शुरू हो गई थी। दिसंबर में यह 0.71 फीसदी से बढ़कर 1.33 फीसदी हो गई थी। वहीं नई सीरीज के अनुसार महंगाई में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ऑल इंडिया CPI के आधार पर जनवरी 2026 में सालाना महंगाई दर (जनवरी 2025 की तुलना में) 2.75% रही।
देश भर में खाद्य महंगाई : 2.13%
ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई: 1.96%
शहरी क्षेत्रों में खाद्य महंगाई: 2.44%
नए CPI बास्केट में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें पहले के 299 आइटम के मुकाबले 350 से ज्यादा आइटम शामिल हैं। नए जोड़े गए आइटम में AirPods जैसे वायरलेस ईयरफोन, पेट फूड, सैनिटाइजर, फिटनेस बैंड और एयर प्यूरीफायर शामिल हैं। ये चीजें शहरीकरण, अधिक खर्च करने योग्य इनकम और महामारी के बाद हेल्थ अवेयरनेस से बदलते कंजम्पशन पैटर्न को समझने के लिए शामिल की गई हैं।
जनवरी 2026 में सालाना हाउसिंग महंगाई दर 2.05% दर्ज की गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में हाउसिंग महंगाई: 2.39%
शहरी क्षेत्रों में हाउसिंग महंगाई: 1.92%
कुल मिलाकर, खाद्य और आवास से जुड़े खर्चों में सीमित बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे रिटेल महंगाई अभी भी नियंत्रित दायरे में बनी हुई है। नई CPI सीरीज और बदले बेस ईयर के साथ आगे महंगाई के रुझानों पर बाजार और आरबीआई की नजर बनी रहेगी।
बदले हुए CPI इंडेक्स में एक बड़ा बदलाव यह है कि खाने की चीजों का वेटेज (हिस्सा) कम हो गया है। खाने की चीजों का वेटेज पहली बार 40 फीसदी से कम हो गया है। वहीं नॉन-फूड कैटेगरी अब इंडेक्स में 60 फीसदी से अधिक हैं, जो पहले लगभग 45 फीसदी था। साथ ही, ग्रामीण खपत को ज्यादा असरदार वजन दिया गया है, जो कुल मांग में इसके बढ़ते योगदान को दिखाता है।
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