Retail Inflation: देश में रिटेल महंगाई चीते की रफ्तार से भाग रही है। यह थमने का नाम नहीं ले रही है। मई महीने के महंगाई के आंकड़े आ गए हैं। मई 2026 में भारत की रिटेल महंगाई दर (Consumer Price Index-CPI) बढ़कर 3.93% हो गई, जो अप्रैल में 3.48% थी। यह लगातार पांचवां महीना है जब महंगाई के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह रही।
हालांकि महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य के आसपास बनी हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं और नीति निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार 16वें महीने महंगाई दर RBI के लक्ष्य के नीचे है।
मई में चार बार बढ़ी फ्यूल की कीमतें
महंगाई दर के ये आकंड़े ऐसे समय आए हैं, जब सरकारी फ्यूल कंपनियों ने अकेले मई में ही चार बार फ्यूल की कीमतें बढ़ाईं। इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ गया। परिवहन महंगाई अप्रैल के -0.01% से बढ़कर मई में 1.75% हो गई। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे माल ढुलाई महंगी होती है और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ती हैं।
खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाया दबाव
महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी रही। मई में खाद्य महंगाई बढ़कर 4.78% पर पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी। सब्जियां, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ा। जानकारों का मानना है कि पिछले वर्ष के कम आधार प्रभाव (Base Effect) और मौसमी कारणों ने भी खाद्य महंगाई को ऊपर पहुंचा दिया है। ग्रामीण इलाकों में फूड इन्फ्लेशन 4.85% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% दर्ज की गई।
मध्य पूर्व संकट का भी असर
मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है। यही कारण है कि हाल के महीनों में ईंधन और परिवहन लागत में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
नए तरीके से मापी जा रही महंगाई, OTT शामिल
यह महंगाई के नए फॉर्मूले (2024 बेस ईयर) के तहत जारी तीसरा आंकड़ा है। सरकार ने महंगाई नापने के बास्केट में भी बदलाव किया है। खाने-पीने की चीजों का वजन (वेटेज) 45.9% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है, जबकि हाउसिंग और बिजली-गैस का वेटेज बढ़ा दिया गया है।
नई सीरीज में क्या है खास?
बदले हुए CPI इंडेक्स में एक बड़ा बदलाव यह है कि खाने की चीजों का वेटेज (हिस्सा) कम हो गया है। खाने की चीजों का वेटेज पहली बार 40 फीसदी से कम हो गया है। वहीं नॉन-फूड कैटेगरी अब इंडेक्स में 60 फीसदी से अधिक हैं, जो पहले लगभग 45 फीसदी था। साथ ही, ग्रामीण खपत को ज्यादा असरदार वजन दिया गया है, जो कुल मांग में इसके बढ़ते योगदान को दिखाता है।
महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?
महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।