
Retail Inflation November: भारत की रिटेल महंगाई नवंबर में हल्की बढ़त के साथ 0.71 फीसदी पर पहुंच गई है। अक्टूबर में यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर थी, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट की रफ्तार कम होने से नवंबर का आंकड़ा थोड़ा ऊपर चला गया है। यह लगातार 10वां महीना है जब मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के 2 फीसदी से 6 फीसदी के लक्ष्य दायरे से नीचे रही है। महंगाई का इतना कम रहना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार नवंबर 2025 में खाद्य कीमतों में 3.91 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो अक्टूबर में 5.02 फीसदी थी। यानी कीमतों में गिरावट की रफ्तार काफी धीमी पड़ चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि खाद्य सेक्टर में दबाव बढ़ रहा है। सब्ज़ियों की कीमतों में 22.20% की गिरावट आई, जबकि एक महीने पहले इनमें 27.57% की ज़्यादा गिरावट आई थी।
नवंबर महीने में महंगाई में बढ़ोतरी सब्जियों, अंडे, मांस-मछली, मसालों, फ्यूल और लाइट की कीमतें बढ़ने की वजह से हुई है। सरकार ने शुक्रवार, 12 दिसंबर को महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। नवंबर महीने में ग्रामीण महंगाई दर -0.25% से बढ़कर माइनस 0.10% हो गई है। वहीं शहरी महंगाई 0.88% से बढ़कर 1.40% पर आ गई है। ईंधन और बिजली की महंगाई भी 1.98 फीसदी से बढ़कर 2.32 फीसदी तक पहुंच गई है, जिसका असर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है।
सरकार को भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टैक्स कटौती और लेबर रिफॉर्म जैसी नीतियां अमेरिकी टैरिफ के असर को भी सीमित कर देंगी। उधर RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया है। इसके साथ ही जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.8 फीसदी से बढ़ाकर 7.3 फीसदी कर दिया गया है। कुल मिलाकर, नवंबर की महंगाई भले थोड़ी बढ़ी हो, लेकिन अर्थव्यवस्था की रफ्तार और नीतिगत सपोर्ट इसे अब भी दुनिया की सबसे मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्थाओं में जगह मिली है।
महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।
एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है।
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