India Energy Policy: भारत की ऊर्जा नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज़ हो गई है। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बयान दिया है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। उनका यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में भारत ने दोहराया था कि कच्चे तेल की खरीद के फैसले राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ही किए जाएंगे।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नयी दिल्ली के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया था कि भारत ने रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने की प्रतिबद्धता जतायी है। तब से ही, अमेरिका ने कई बार दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।
रूसी तेल खरीद बंद करने का वादा
शनिवार को म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में रुबियो ने कहा कि भारत के साथ हमारी बातचीत में हमें उनकी प्रतिबद्धता मिली है कि वे अतिरिक्त रूसी तेल खरीदना बंद कर देंगे।रुबियो रूस-यूक्रेन युद्ध और मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
इस समझौते की घोषणा के बाद, ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश में भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अगस्त में लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को वापस ले लिया था। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को कहा था कि कच्चे तेल की खरीद पर भारत का दृष्टिकोण ऊर्जा प्रवाह में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखने और उनमें विविधता लाने का रहा है।
तेल आयात पर राष्ट्रहित देखेगा भारत
बता दें कि रूस से तेल खरीद को लेकर चल रही अलग-अलग तरह की बयानबाजी के बीच भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि तेल आयात के बारे में कोई भी फैसला लेते समय राष्ट्रीय हित और देशवासियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जायेगी।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को कहा कि ये सबको पता है कि भारत को अपनी जरूरत के लिए बड़ी मात्रा में तेल आयात करना पड़ता है और यह विभिन्न देशों और स्रोतों से लिया जाता है। उन्होंने किसी भी देश का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि भारत तेल आयात के मामले में किसी दबाव में नहीं आयेगा।उन्होंने कहा कि भारत की पहले से ही यह नीति रही है कि वह देशवासियों को सस्ता तेल उपलब्ध कराने के लिए विविध स्रोतों से आपूर्ति की रणनीति पर काम करता रहा है।