
Sahara-Adani Property Deal: वित्तीय संकट से जूझ रही सहारा इंडिया परिवार की संपत्तियों को लेकर चल रही खींचतान एक नए मोड़ पर आ गई है। सहारा की प्रॉपर्टी डील हजारों करोड़ रुपये की है। इसमें देश के दो बड़े कॉर्पोरेट नाम सहारा और अडानी आमने-सामने हैं। इसबीच केंद्र सरकार ने वित्तीय संकट से जूझ रही सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (Sahara India Commercial Corporation Ltd - SICCL) की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा है।
बता दें कि सहारा ग्रुप अपनी आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए अपनी बेशकीमती संपत्तियां अडानी ग्रुप को बेचना चाहता है। इसके लिए SICCL ने महाराष्ट्र में एंबी वैली और लखनऊ में सहारा शहर सहित 88 संपत्तियों को 12,000 करोड़ रुपये में बेचने के लिये सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मांगी थी।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की पीठ के सामने समय की मांग का अनुरोध किया था। अदालत ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और मामले की सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी गई है।
मेहता ने यह भी अनुरोध किया कि वित्त मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय को भी कार्यवाही में पक्षकार बनाया जाए, क्योंकि उन्होंने सहारा समूह की संस्थाओं में निवेश किया था या उनसे आर्थिक रूप से संबद्ध थीं। सरकार का तर्क है कि सहारा ग्रुप की कई सहकारी समितियों (Cooperative Societies) का पैसा इसमें फंसा हुआ है। इसका सीधा संबंध आम निवेशकों से है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सहारा कर्मचारियों द्वारा लंबित वेतन जारी करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई भी टाल दी है। इस मामले में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफड़े ने अदालत को बताया कि उन्हें सहारा की ओर से बेची जाने वाली संपत्तियों को लेकर कई आपत्तियां मिली हैं, उन्होंने विशेष रूप से 34 संपत्तियों पर आपत्ति दर्ज कराई है। शेखर ने सुझाव दिया कि कंपनी को अपनी संपत्तियों की एक विस्तृत सूची अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, अदालत ने इस पर कोई आदेश नहीं दिया है।
सहारा समूह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि वे न्यायामित्र के नोट पर अपना जवाब दाखिल करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई संपत्तियां जाली दस्तावेजों के आधार पर बेची या लीज पर दी गई थीं। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि बिक्री या लीज के दस्तावेजों की जांच का उपयुक्त मंच ट्रायल कोर्ट या कोई नियुक्त समिति होगी।
यह डील सिर्फ जमीन के टुकड़ों की नहीं है, बल्कि इसमें देश की कुछ सबसे प्रतिष्ठित संपत्तियां शामिल हैं। सहारा ग्रुप जिन 88 संपत्तियों को बेचना चाहता है, उनमें महाराष्ट्र की मशहूर ‘एम्बी वैली सिटी’, मुंबई का ‘होटल सहारा स्टार’, और लखनऊ का ‘सहारा शहर’ व ‘सहारा गंज’ शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि अडानी प्रॉपर्टीज इन सभी संपत्तियों को एक साथ खरीदने के लिए तैयार है।
पिछली सुनवाई (14 अक्टूबर) में अडानी की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया था कि वे सभी 88 संपत्तियों को ‘जैसी है, जिस हाल में है’ (As is where is) के आधार पर खरीदने को राजी हैं। अडानी ग्रुप का कहना है कि वे विवादित संपत्तियों को भी ले लेंगे ताकि लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सके और डील जल्दी पूरी हो।
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