SEBI चीफ और सीनियर अधिकारियों को संपत्तियों का खुलासा करना जरूरी, हाई लेवल पैनल ने की सिफारिश

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के वरिष्ठ अधिकारियों से संपत्तियों और देनदारियों का सार्वजनिक खुलासा करने की सिफारिश की गई है। यह कदम पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ लगे आरोपों के मद्देनजर उठाया गया है। 

Shivam Shukla( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड12 Nov 2025, 06:43 PM IST
SEBI चीफ और सीनियर अधिकारियों को संपत्तियों का खुलासा करना जरूरी
SEBI चीफ और सीनियर अधिकारियों को संपत्तियों का खुलासा करना जरूरी

हाईलेवल कमेटी ने सेबी चेयरमैन और सीनियर अधिकारियों की पारदर्शिता और जबावदेही बढ़ाने के लिए अपनी संपत्तियों और देनदारियों का सार्वजनिक खुलासा करने का सुझाव दिया है। पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने यह भी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि सभी सेबी बोर्ड मेंबर्स और कर्मचारियों को परिसंपत्तियों, देनदारियों, व्यापारिक गतिविधियों व पारिवारिक संबंधों के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक और रिलेशन इंट्रेस्ट का शुरुआत, एनुअल और कुछ भी बदलाव होने पर व उससे अलग होने से जुड़े खुलासे करना चाहिए।

रिपोर्ट में कही गई ये बातें

कमेटी ने कहा कि यह खुलासा प्रस्तावित SEBI के नैतिकता एवं अनुपालन कार्यालय (OEC) और नैतिकता एवं अनुपालन निरीक्षण समिति (OCEC) के सामने किया जाना चाहिए। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय को 10 नवंबर को सौंपी गई रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि चेयरमैन व सदस्यों के पद और ‘लैटरल एंट्री’ पदों के लिए आवेदकों को नियुक्ति प्राधिकारी के सामने वित्तीय व गैर-वित्तीय प्रकृति के वास्तविक, संभावित और कथित हितों के टकराव के जोखिमों का खुलासा करना होगा।

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पार्ट टाइम मेंबर्स को मिलेगी छूट

कमेटी की रिपोर्ट में चेयरमैन, डब्ल्यूटीएम (फुलटाइम मेंबर) और सीजीएम (मुख्य महाप्रबंधक) तथा उससे ऊपर के स्तर के सेबी कर्मचारियों को अपनी परिसंपत्तियों व देनदारियों का सार्वजनिक विवरण देने का सुझाव दिया गया। इसमें कहा गया कि सेबी बोर्ड के पार्ट टाइम मेंबर्स को इससे छूट दी जा सकती है क्योंकि वे सेबी की दिन-प्रतिदिन की नियामक गतिविधियों को नहीं संभालते हैं।

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इस लिए पड़ी रिव्यू की जरूरत

बता दें कि सेबी बोर्ड के पार्ट टाइम मेंबर कॉरपोरेट मामलों व वित्त मंत्रालयों के सचिव हैं। मौजूदा समय में चेयरमैन पांडेय के नेतृत्व में सेबी बोर्ड में दो फुल टाइम मेंबर और दो पार्ट टाइम मेंबर हैं। सेबी बोर्ड ने हितों के टकराव और सेबी सदस्यों एवं अधिकारियों की तरफ संपत्ति, निवेश, देनदारियों तथा अन्य संबंधित मामलों के खुलासे से संबंधित मौजूदा प्रावधानों की व्यापक समीक्षा करने के लिए समिति गठित करने का मार्च में निर्णय लिया था। यह कदम सेबी की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ लगे आरोपों के मद्देनजर उठाया गया। उन पर हितों के टकराव के कारण अडानी ग्रुप के खिलाफ जांच रोकने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, बुच और अडानी ग्रुप दोनों ने इस आरोपों का खंडन किया है।

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