
SEBI: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (Securities and Exchange Board of India - SEBI) ने कम रिस्क वाले विदेशी इन्वेस्टर्स के लिए इंडियन सिक्योरिटीज़ मार्केट में हिस्सा लेना आसान कर दिया है। इसके लिए सिंगल विंडो एक्सेस शुरू किया गया है। इस कदम का मकसद कम्प्लायंस को आसान बनाना और इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के तौर पर देश को और आकर्षक बनाना है। इसके लिए नया फ्रेमवर्क सिंगल विंडो ऑटोमैटिक एंड जेनरलाइज्ड एक्सेस फॉर ट्रस्टेड फॉरेन इनवेस्टर्स (SWAGAT-FI) लॉन्च किया गया है।
बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, इस नए फ्रेमवर्क से कम जोखिम वाले विदेशी निवेशकों को निवेश करना आसान हो जाएगा। मल्टीपल इन्वेस्टमेंट रुट्स में यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को सक्षम करेगा और ऐसी संस्थाओं के लिए बार-बार अनुपालन और दस्तावेजों की जरूरत कम होगी। मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से पहचाने गए कम जोखिम वाले विदेशी निवेशकों में सरकारी स्वामित्व वाले फंड, सेंट्रल बैंक, सॉवरेन वेल्थ फंड, मल्टीलेटरल एंटिटी, उच्च विनियमित सार्वजनिक खुदरा फंड (highly regulated public retail funds) और उचित रूप से विनियमित बीमा कंपनियाों के साथ पेंशन कोष शामिल हैं।
1 दिसंबर की दो अलग-अलग नोटिफिकेशन के अनुसार, सेबी ने FPI और फॉरेन वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर्स (Foreign Venture Capital Investors - FVCIs) के लिए SWAGAT-FI फ्रेमवर् लॉन्च किया गया। इसे लागू करने के लिए, सेबी ने एफपीआई और एफवीसीआई नियमों में संशोधन किया है, जो एक जून, 2026 से लागू होंगे। सेबी निदेशक मंडल ने सितंबर में इस संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह संशोधन उस मंजूरी के बाद किया गया है।
नए फ्रेमवर्क के तहत, रेगुलेटर ने रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई करने वाले/पहले से ही FPI के रूप में रजिस्टर्ड SWAGAT-FI को बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता के, FVCI के रूप में भी रजिस्टर करने का ऑप्शन दिया गया है। FPI और FVCI दोनों रेगुलेशन के तहत पंजीकरण से SWAGAT-FI भारतीय कंपनियों के लिस्टेड इक्विटी इंस्ट्रूमेंट और डेट सिक्योरिटीज में एफपीआई के रूप में और निर्दिष्ट क्षेत्रों में कार्यरत गैर-सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप में संबंधित नियमों के तहत एफवीसीआई के रूप में निवेश कर सकेंगे।
अनुपालन को आसान बनाने के लिए रेगुलेटर ने रजिस्ट्रेशन जारी रखने की अवधि को मौजूदा तीन या पांच साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया है। इसमें शुल्क का भुगतान और केवाईसी दस्तावेजों की समीक्षा शामिल है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससी) से संचालित एफपीआई के लिए कारोबार को सुगम बनाने के लिए, सेबी ने आईएफएससी में निवासी भारतीय प्रायोजक या प्रबंधक के साथ खुदरा योजनाओं को एफपीआई के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति दी है।
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