सेबी ने लॉन्च किया PaRRVA, अब पकड़े जाएंगे शेयरों पर रिटर्न के फर्जी दावे

SEBI: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने केयर रेटिंग्स और NSE का एक पायलट सिस्टम PaRRVA लॉन्च किया है। यह रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज़ की ओर से क्लेम किए गए पिछले रिटर्न को वेरिफाई करने के लिए है। इससे अब शेयरों पर रिटर्न के फर्जी दावो को पकड़ने में मदद मिलेगी।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड9 Dec 2025, 09:37 PM IST
SEBI: सेबी का कहना है कि PaRRVA अग्रणी व्यवस्था के रूप में काम करेगा।
SEBI: सेबी का कहना है कि PaRRVA अग्रणी व्यवस्था के रूप में काम करेगा।

SEBI: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (Securities and Exchange Board of India - SEBI) ने आम निवेशकों की बेहतरीन सुविधा मुहैया कराने के लिए एक और अच्छा कदम उठाया है। दरअसल, बाजार में निवेश उत्पादों की गलत बिक्री रोकने और मानकीकृत रिपोर्ट के जरिये निगरानी बढ़ाने के लिए सेबी ने एक नई 'पास्ट रिस्क एंड रिटर्न वेरिफिकेशन एजेंसी' की शुरुआत की। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि नई 'पास्ट रिस्क एंड रिटर्न वेरिफिकेशन एजेंसी' (Past Risk and Return Verification Agency - PaRRVA), एक तकनीक आधारित सुधार है। इसका मकसद डिजिटल आडिट ट्रेल्स के जरिए रिपोर्टिंग में विश्वसनीयता और स्थिरता लाना है।

यह एजेंसी बाजार से जुड़े संस्थानों द्वारा पहले दिए गए रिटर्न के दावों की सच्चाई की जांच करेगी।केयर रेटिंग्स और एनएसई ने मिलकर PaRRVA को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किया। इस कदम से निवेशकों को सही और भरोसेमंद जानकारी मिलने में मदद मिलेगी। यह एक नया वेरिफिकेशन सिस्टम है जिसे रेगुलेटेड मार्केट इंटरमीडियरीज़ द्वारा किए गए पिछले परफॉर्मेंस क्लेम को ऑथेंटिकेट करने के लिए डिजाइन किया गया है।

क्या है PaRRVA?

सेबी ने यह कदन बढ़ते फिनफ्लुएंसर्स और नॉन-रजिस्टर्ड संस्थाओं को ध्यान में रखकर उठाया है। PaRRVA के आने से अब कोई भी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार, रिसर्च एनालिस्ट या ब्रोकर जब भी शेयरों पर रिटर्न को लेकर कोई दावा करेगा तो पहले उसे Care PaRRVA के जरिए अपने दावों का सत्यापन कराना होगा। ऐसे में पहले दावों का वेरिफिकेशन होगा, फिर विज्ञापन आएगा। इसके साथ ही बिना वेरीफिकेशन के अब रिटर्न बेस्ड प्रमोशन मुश्किल हो जाएगा।

सेबी प्रदर्शन दावों पर निगरानी क्यों बढ़ा रहा है?

यह नई व्यवस्था इसलिए लाई गई है ताकि फिनफ्लुएंसर्स और भ्रामक दावों से होने वाले जोखिमों को कम किया जा सके। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि बाजार में कई अनरजिस्टर्ड लोग और फिनफ्लुएंसर्स निवेशकों को गलत या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए रिटर्न के दावों से आकर्षित कर रहे हैं।

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इससे असली और नियमों के तहत काम करने वाले संस्थानों का काम दब जाता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर रजिस्टर्ड इंटरमीडियरी (जैसे इन्वेस्टमेंट एडवाइजर, रिसर्च एनालिस्ट) अपने जांच-पड़ताल में किए गए डेटा प्रदर्शन को निवेशकों तक पहुंचाए, तो निवेशक बेहतर और सही निर्णय ले सकेंगे।

क्या फायदा होगा

शेयर मार्केट में फेक एडवाइजरी का खेल सालों से चलता आया है। कई अनरजिस्टर्ड एडवाइजर और फिनइंफ्लुएंसर्स मोटे रिटर्न का दावा कर लोगों को धोखा देते हैं। हालांकि, अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। अगर सेबी का यह नया सिस्टम सफल रहा तो शेयरों पर रिटर्न को लेकर फर्जीदावे तुरंत पकड़ में आएंगे।

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