अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) के प्रभाव से निर्यातकों को बचाने के लिए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को उन विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में इकाइयों की निष्क्रिय क्षमता का उपयोग करने, उन क्षेत्रों की निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार में मदद के लिए एकमुश्त उपायों की घोषणा की जिन पर टैरिफ की सबसे अधिक मार पड़ी है। इस बीच वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थित यूनिट्स को घरेलू बाजार में सामान बेचने की अनुमति दी जाएगी। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार ने रविवार को बजट में एक विशेष उपाय के रूप में एसईजेड इकाइयों को कुछ शर्तों और मात्रात्मक प्रतिबंधों के साथ घरेलू बाजार में रियायती आयात शुल्क दरों पर अपना माल बेचने की अनुमति देने की घोषणा की है। यह इन क्षेत्रों की लंबे समय से लंबित मांग थी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं और श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर भारत में उच्च आयात शुल्क के कारण वे अपने अतिरिक्त उत्पादन को घरेलू बाजार में नहीं बेच पा रहे थे।
SEZ से सामान खरीदने में मिलेगी मदद
सचिव ने कहा कि इस प्रस्ताव से अन्य देशों से आयात करने के बजाय एसईजेड इकाइयों से ही सामान खरीदने में मदद मिलेगी। अग्रवाल ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''यह कदम आयात प्रतिस्थापन में मदद करेगा और बेहतर रोजगार सृजन सुनिश्चित करेगा। इससे घरेलू क्षेत्र की कंपनियों और एसईजेड इकाइयों के बीच प्रतिस्पर्धा के समान अवसर भी उपलब्ध होंगे।'' उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव से चमड़ा, कपड़ा और इंजीनियरिंग जैसे सात-आठ क्षेत्रों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, जिन पर भारत में उच्च आयात शुल्क लगता है। मौजूदा समय में एसईजेड से घरेलू बाजार में आने वाले माल पर भारी आयात शुल्क देना पड़ता है।
बजट 2026 में दिया गया प्रस्ताव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि वैश्विक व्यापार में व्यवधान के कारण एसईजेड की विनिर्माण इकाइयों में क्षमता के उपयोग को लेकर पैदा हुई चिंताओं को दूर करने के लिए, ''मैं एक विशेष एकमुश्त उपाय के रूप में पात्र एसईजेड इकाइयों द्वारा घरेलू बाजार डीटीए में रियायती शुल्क दरों पर माल की बिक्री की सुविधा देने का प्रस्ताव करती हूं।'' ऐसी बिक्री की मात्रा उनके निर्यात के एक निर्धारित अनुपात तक सीमित होगी। इन उपायों को लागू करने के लिए आवश्यक नियामकीय बदलाव किए जाएंगे, ताकि इन क्षेत्रों से बाहर काम करने वाली इकाइयों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।
कंपनियों पर लगेगी बिक्री लिमिट
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि घरेलू उद्योगों को समान अवसर देने के लिए एसईजेड इकाइयों द्वारा घरेलू बाजार में की जाने वाली बिक्री पर एक सीमा लगाई जाएगी। वाणिज्य सचिव ने स्पष्ट किया कि वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से जो श्रम-प्रधान वस्तुएं रियायती शुल्क पर भारत आ रही हैं, उन्हें अब देश के भीतर ही स्थित एसईजेड इकाइयों से खरीदा जा सकेगा।