भारत में 20% मॉल बने 'भूत बंगला', करोड़ों का लगा चूना, रिपोर्ट में खुलासा

देश में कई ऐसे मॉल है, जहां सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां दुकानें खाली पड़ी हुई है। नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट में ऐसे मॉल को घोस्ट मॉल कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में खाली पड़े शॉपिंग केंद्रों की संख्या में वृद्धि के चलते 6,700 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।

Jitendra Singh
अपडेटेड10 Dec 2025, 09:11 PM IST
‘घोस्ट मॉल्स’ से  <span class='webrupee'>₹</span>357 करोड़ की सालाना कमाई हो सकती है।
‘घोस्ट मॉल्स’ से ₹357 करोड़ की सालाना कमाई हो सकती है।

भारत का रिटेल रियल एस्टेट एक अजीब दौर से गुजर रहा है। ग्राहकों की ओर से नए शॉपिंग मॉल की मांग तेजी से बढ़ रही है। वहीं दूसरी तरफ कई ऐसे मॉल है, जहां सन्नाटा पसरा हुआ है। कई बड़े-बड़े शॉपिंग सेंटर हैं, लेकिन न तो वहां दुकानदार हैं और न ही खरीदार। ये गगनचुंबी इमारते दिखावटी साबित हो रही हैं। देश के लगभग 20% शॉपिंग मॉल खाली पड़े हैं और उन्हें 'घोस्ट मॉल' कहा जाने लगा है। रियल्टी कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 32 शहरों में 365 शॉपिंग सेंटर में से करीब 74 सेंटर बंद हो चुके हैं। इन बंद हुए शॉपिंग सेंटर यानी को 'घोस्ट मॉल' कहा गया है।

बिजनेस स्टैंडर्ट में छपी खबर के मुताबिक, नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे ‘घोस्ट मॉल’ से हर साल करीब 357 करोड़ रुपये का किराया कमाया जा सकता है। घोस्ट मॉल में 50 फीसदी से ज्यादा जगह खाली पड़ी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मॉल 1.55 करोड़ वर्ग फुट की जगह घेरे हुए हैं। इस जगह का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं हो रहा है। इस बेकार पड़ी जगह से करोड़ों का चूना लग रहा है। अगर इस बेकार पड़ी जगह का रणनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जाए तो करोड़ों में किराया मिल सकता है। घोस्ट मॉल से तात्पर्य उन मॉल से है जो 40 फीसदी से ज्यादा खाली हैं।

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क्यों खाली पड़े हैं मॉल?

रिपोर्ट में खाली पड़े मॉल्स में से 15 ऐसे सेंटरों की पहचान की गई है, जिनमें बहुत अच्छी क्षमता है कि उन्हें फिर से सफल बनाया जा सकता है। इन 15 मॉल्स का कुल क्षेत्रफल 48 लाख वर्ग फुट है। अगर इन्हें ठीक से सुधारा जाए, तो बड़े टियर 1 शहरों में 29 लाख वर्ग फुट की जगह से सालाना 236 करोड़ का किराया मिल सकता है। वहीं, छोटे टियर 2 शहरों में भी 20 लाख वर्ग फुट की जगह को पुनर्जीवित करके सालाना 121 करोड़ का अतिरिक्त किराया राजस्व प्राप्त किया जा सकता है, जिससे पुनरुद्धार की कुल क्षमता 357 करोड़ तक पहुंच जाती है।

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किस शहर में मॉल एकदम खचाखच हैं?

रिपोर्ट में कुछ शहरों की तारीफ की गई है, जहां मॉल लगभग पूरी तरह भरे हुए हैं। इनमें मैसूरु में सिर्फ 2% जगह खाली है। विजयवाड़ा में 4%, वडोदरा में 5%, तिरुवनंतपुरम और विशाखापट्टनम में 6-6 फीसदी मॉल खाली पड़े हैं। भले ही 32 शहरों में औसतन 15.4% दुकानें खाली हैं, लेकिन नाइट फ्रैंक का कहना है कि असली दिक्कत यह है कि अच्छी क्वालिटी की रिटेल दुकानें बहुत कम हैं। खासकर छोटे टियर 2 शहरों में, जहां ग्राहकों की मांग तो तेजी से बढ़ रही है, पर उस मांग के हिसाब से अच्छी जगहें उपलब्ध नहीं हैं।

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