Oil Prices: दुनिया की अर्थव्यवस्था कई बार ऐसी चीजों पर टिकी होती है, जिनके बारे में आम लोग ज्यादा सोचते भी नहीं। इस वक्त होर्मुज जलडमरूमध्य भी ऐसा ही एक रास्ता है जिसपर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई है। दरअसल, होर्मुज, समुद्र का वह पतला सा रास्ता है जहां से दुनिया का एक-तिहाई कच्चा तेल गुजरता है।
अभी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण इस रास्ते का बंद होना पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन गया है। तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है और बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि, इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता चल रही है और उम्मीद की किरण दिख रही है, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो मामला इतना सीधा नहीं है। अगर आज युद्ध रुक भी जाए, तो क्या तेल की कीमतें तुरंत गिरेंगी। इसका जवाब इतना सरल नहीं है। चलिए पूरी बात समझते हैं।
क्यों तुरंत राहत की उम्मीद करना है जल्दबाजी?
द इकोनॉमिस्ट के डिप्टी एडिटर एडवर्ड कार ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर बातचीत सफल भी रहती है, तो भी कीमतों को सामान्य होने में लंबा समय लगेगा। इसके पीछे उन्होंने तीन मुख्य कारण बताए हैं:
ईरान की 'गेम प्लानिंग': हॉर्मुज को फिर से खोलना कोई स्विच दबाने जैसा नहीं है। आशंका है कि ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कोई नया 'टोल' या किराया वसूलने की कोशिश करे। अगर ऐसा होता है, तो माल ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा।
सप्लाई चेन की रुकावट: होर्मुज बंद होने की वजह से कई जहाज अटके हुए हैं और कई तेल के कुओं को बंद करना पड़ा है। एडवर्ड कार समझाते हैं कि बंद पड़े कुओं को फिर से शुरू करना और सप्लाई को सुचारू बनाना एक समय लेने वाली प्रक्रिया है। बाजार तक तेल पहुंचने में हफ्तों लग सकते हैं।
भविष्य का डर: सबसे बड़ी बात यह है कि ईरान ने दुनिया को दिखा दिया है कि वह होर्मुज के साथ-साथ खाड़ी देशों के पावर प्लांट और पाइपलाइनों को भी निशाना बना सकता है। यह एक ऐसा डर है जो निवेशकों और बाजार को भविष्य में भी परेशान करता रहेगा।
नेवी नहीं, अब 'हवाई खतरों' का है जमाना
हॉर्मुज में ईरान की पकड़ को लेकर एक और दिलचस्प बात सामने आई है। ब्लेस मिस्ज्टल (वाइस प्रेसिडेंट, JINSA) ने ब्लूमबर्ग को बताया कि युद्ध की शुरुआत में ईरान के पास माइन्स और तेज रफ्तार नावों जैसी नौसैनिक ताकत थी, लेकिन आज खतरा कुछ और है।
मिस्ज्टल के अनुसार, ईरान अब ड्रोन के जरिए आसमान से जहाजों को निशाना बना रहा है। इस लगातार हवाई खतरे की वजह से कमर्शियल जहाजों ने इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है। यह नई तकनीक ईरान को समुद्र में एक खतरनाक बढ़त देती है, जिसे रोकना किसी भी सेना के लिए बड़ी चुनौती है।
भले ही इस्लामाबाद में डिप्लोमेट्स हाथ मिला लें, लेकिन होर्मुज की जटिलता और ईरान के नए हथियारों ने ऊर्जा सुरक्षा को एक नए जोखिम में डाल दिया है। जब तक जहाजों के लिए यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं होता और सप्लाई चेन की बाधाएं दूर नहीं होतीं, तब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी राहत की उम्मीद करना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।