
Economic Survey Main Points: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण पर रिपोर्ट आज संसद में पेश कर दी। वित्त वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की अर्थव्यवस्था को 'स्वदेशी' से आगे बढ़कर 'रणनीतिक अनिवार्यता' की ओर ले जाने की रूपरेखा बताई गई है। आइए, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के 10 सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर नजर डालते हैं।
सर्वेक्षण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी विकास दर 7% से अधिक रहने का अनुमान है। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अगले वर्ष भी विकास दर 7% या उसके आसपास रहने की संभावना है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को दर्शाता है।
सरकार ने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है। वित्तीय वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8% रहा, जो 4.9% के बजट अनुमान से कम है । वित्तीय वर्ष 2026 के लिए इसे 4.4% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि में हेडलाइन सीपीआई (CPI) घटकर 1.7% पर आ गई है, जिसका मुख्य कारण सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट है । मुख्य महंगाई (Core Inflation) भी नियंत्रण में है, हालांकि कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का कुछ प्रभाव देखा गया है ।
सर्वेक्षण का केंद्रीय विषय 'स्वदेशी' से 'रणनीतिक अनिवार्यता' की ओर बढ़ना है। इसका अर्थ है कि भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Global Value Chains) में इतना महत्वपूर्ण बनना होगा कि उसे नजरअंदाज करना या प्रतिस्थापित करना संभव न हो। यह केवल आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि वैश्विक निर्भरता भारत पर बढ़ाने की रणनीति है ।
विनिर्माण क्षेत्र ने मजबूत वापसी की है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में उद्योग के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में 7% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि 'मेक इन इंडिया' और पीएलआई (PLI) जैसी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन का संकेत है।
सर्वेक्षण ने 2026 के लिए तीन संभावित वैश्विक परिदृश्य प्रस्तुत किए हैं: 'प्रबंधित अव्यवस्था' (Managed Disorder), 'अव्यवस्थित बहुध्रुवीय टूटन' (Disorderly Multipolar Breakdown), और 'प्रणालीगत झटकों का सिलसिला' (Systemic Shock Cascade)। भारत को इन तीनों स्थितियों से निपटने के लिए अपनी आर्थिक बफर्स (Buffers) को मजबूत करने की सलाह दी गई है।
वर्ष 2025 में भारतीय रुपये का प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा है और सर्वेक्षण का मानना है कि रुपया अपनी क्षमता से नीचे (punching below its weight) कारोबार कर रहा है। हालांकि, कमजोर रुपया अमेरिकी शुल्कों के प्रभाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है ।
कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है। वर्ष 2024-25 में अनाज का उत्पादन रिकॉर्ड 3,320 लाख टन तक पहुंच गया है। रबी की बुवाई में भी पिछले वर्ष की तुलना में 3.3% की वृद्धि देखी गई है, जो खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय के लिए सकारात्मक संकेत है।
सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) में भारी बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2026 के लिए इसके लिए 11.21 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो वित्त वर्ष 2022 के 5.92 लाख करोड़ रुपये से लगभग 89% अधिक है ।
सर्वेक्षण में राज्य की क्षमता (State Capacity) को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें 'उद्यमी राज्य' (Entrepreneurial State) की अवधारणा पेश की गई है, जो जोखिम लेने और अनिश्चितता के बीच निर्णय लेने में सक्षम हो। लक्ष्य शासन को 'रूलर्स राज' से 'सिटिजन्स राज' में बदलना है।
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