Sunset Clause in India: भारत में 1 अप्रैल से लागू होगा ‘सनसेट क्लॉज’, अधिकारियों को करना होगा यह काम

Sunset Clause in India: वित्त मंत्रालय ने केंद्र की सभी योजनाओं के लिए ‘सनसेट क्लॉज’ और टाइम लाइन अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए वित्त मंत्रालय से निर्देश जारी कर दिए हैं। आइये जानते हैं ‘सनसेट क्लॉज’ क्या है और अब अधिकारियों को क्या करना होगा। 

Jitendra Singh
अपडेटेड11 Dec 2025, 01:16 PM IST
Sunset Clause in India: 1 अप्रैल 2026 से  ‘सनसेट क्लॉज’ लागू हो जाएगा।
Sunset Clause in India: 1 अप्रैल 2026 से ‘सनसेट क्लॉज’ लागू हो जाएगा।

Sunset Clause in India: वित्त मंत्रालय से ही देशभर की योजनाओं का खाका तैयार होता है। किसी भी योजना के लिए वित्त मंत्रालय की सहमति जरूरी होती है। इसकी वजह ये है कि वित्त मंत्रालय से ही बजट तय होता है। वित्त मंत्रालय अब इन योजनाओं पर अपनी नजर बनाए रखना चाहता है। इसके लिए वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को एक अहम निर्देश दिया है। मंत्रालय ने कहा है कि 16वें वित्त आयोग के साइकिल के तहत शुरू की जाने वाली हर एक नई केंद्र स्पांसर्ड स्कीम यानी सीएसएस और मौजूदा योजनाओं के लिए स्पष्ट ‘सनसेट क्लॉज’ और टाइमलाइन सेट करें।

यह सनसेट क्लॉज 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा। वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों से अतिरिक्त जानकारी भी मांगी है। जिसमें किसी भी योजना को जारी रखने का औचित्य, पिछले पांच वर्षों में वास्तविक व्यय बनाम बजट आवंटन, सेंट्रल पूल से अंतिम लाभार्थी तक धन-प्रवाह और प्रत्येक सीएसएस का वैल्यूएशन करने के बाद योजना के लिए विशेष रूप से सृजित पदों की संख्या जैसी तमाम जानकारी मांगी गई है।

सभी योजनाओं की देना होगा पूरी डिटेल

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ( Department of Expenditure) ने दिसंबर के पहले हफ्ते में यह निर्देश जारी किए हैं। इसमें मंत्रालयों और विभागों से कहा गया है कि वे अपनी मूल्यांकन रिपोर्ट को रिवाइज करें। इसमें नई डिटेल्स शामिल करें और जनवरी के पहले हफ्ते तक अपडेटेड वर्जन जमा करने के लिए कहा गया है। अधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त जानकारी का मतलब यह है कि स्कीम का प्रदर्शन कैसा है। उन मंत्रालयों की भी पहचान करना है जो बार-बार खर्च के टारगेट को पूरा करने से पीछे हट गए हैं।

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इतना ही नहीं अब अधिकारियों को फंड के मूवमेंट की पूरी डिटेल देना होगा। इसके साथ ही इसमें अप्रूवल और रिलीज में लगने वाले समय को भी दर्ज करना होगा। बता दें कि मंत्रालयों को पहले दिसंबर के आखिर तक अपनी रिपोर्ट जमा करनी थी, लेकिन इन अतिरिक्त जरूरतों को देखते हुए उन्हें एक हफ़्ते का अतिरिक्त समय दिया गया।

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जानिए क्या है सनसेट क्लॉज और क्यों जरूरी है

इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत करते हुए एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि साफ निर्देश है कि सभी स्कीम्स में एक सनसेट क्लॉज़ होना चाहिए जो सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ का आकलन करे और नतीजों को हासिल करने के लिए एक रोडमैप और टाइमलाइन सेट करें। यह हर पांच साल में किया जाने वाला यह मूल्यांकन है। हर एक योजना के प्रदर्शन, व्यय की गुणवत्ता, धन के उपयोग और परिणामों की समीक्षा की जाती है।

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