
Air India: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने साफ तौर पर कहा है कि एयर इंडिया को वापस पटरी पर लाना उनके ग्रुप के लिए महज एक कारोबारी मौका नहीं है, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। वो जेआरडी टाटा की 121वीं जयंती के मौके पर मुंबई में बोल रहे थे। चंद्रशेखरन ने बताया कि एविएशन कारोबार बेहद मुश्किल भरा है। दुनिया भर में सप्लाई चेन की दिक्कतें इतनी हैं कि नया विमान मिलना, पुराने को अपग्रेड करना, स्पेयर पार्ट्स का इंतजाम, सब कुछ अनिश्चित हो गया है।
उन्होंने कहा, जो भी प्लान बनाओ, हालात उसी पल बदल जाते हैं। इसके साथ ही ये धंधा बहुत ज्यादा पूंजी मांगता है। मुनाफा बहुत कम हो गया है। कहने का मतलब ये हुआ कि पैसे ढेर सारे लगाओ, कमाई बहुत कम है। चंद्रशेखरन के मुताबिक, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि टाटा समूह के लिए एयर इंडिया केवल एक कारोबारी अवसर नहीं है, यह एक जिम्मेदारी है।”
चंद्रशेखरन का कहना है कि देश की GDP अगर एक फीसदी बढ़ती है तो घरेलू एविएशन में दो फीसदी की ग्रोथ नजर आती है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर अर्थव्यवस्था 8 फीसदी बढ़ी तो एविएशन सेक्टर में 16 फीसदी तक उछाल देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि अगले तीन दशक तक ये खेल चलता रहेगा। यानी भारत की इकॉनमी जितनी तेज भागेगी, एविएशन उतनी ही रफ्तार पकड़ेगा। आने वाला वक्त इस सेक्टर के लिए बेहद रोमांचक होने वाला है।
बता दें कि टाटा समूह ने जनवरी 2022 में घाटे में चल रही एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की भारत सरकार से खरीद कंप्लीट की थी। तब से समूह एक महत्वाकांक्षी 5-वर्षीय ट्रांसफॉरमेशन प्लान पर काम कर रहा है। हालांकि, कई कारणों से प्रगति उम्मीद से धीमी रही है। जेआरडी टाटा ने साल 1932 में एयर इंडिया को टाटा एयरलाइंस के नाम से शुरू किया था। इसके बाद 1953 में एयर इंडिया समेत 11 विमानन कंपनियों का राष्ट्रीयकरण हो गया। लिहाजा एयर इंडिया सरकारी कंपनी बन गई। लेकिन अब यह फिर से प्राइवेट कंपनी है और वापस टाटा समूह के ही पास है।
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