Tata Steel Lawsuit: नीदरलैंड के वेल्सन-नूर्ड इलाके में रहने वाले लोगों ने टाटा स्टील के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कंपनी की गतिविधियों की वजह से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है। इसी को लेकर अब उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और करीब 1.4 अरब यूरो (लगभग ₹14,810 करोड़ रुपये) के मुआवजे की मांग की है।
अदालत में दायर हुआ मामला
टाटा स्टील ने गुरुवार देर रात शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि स्थानीय निवासियों के संगठन स्टिचिंग फ्रिस विंड (SFW) ने यह मुकदमा दायर किया है। यह मामला नीदरलैंड के हारलेम शहर स्थित उत्तरी हॉलैंड की जिला अदालत में दर्ज किया गया है। शिकायत में टाटा स्टील नीदरलैंड बी.वी. और टाटा स्टील इज्मुदेन को प्रतिवादी बनाया गया है।
कंपनी ने आरोपों को किया खारिज
टाटा स्टील ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उस पर लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इनके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। कंपनी के अनुसार, यह दावा केवल अनुमान और धारणाओं पर आधारित है।
किस कानून के तहत दायर हुआ मामला
यह मामला डच कानून WAMCA (Collective Action Act) के तहत दायर किया गया है, जो सामूहिक दावों से जुड़े मामलों पर लागू होता है।इस कानून में मुकदमे की सुनवाई दो चरणों में होती है। पहले चरण में यह देखा जाता है कि मामला स्वीकार करने योग्य है या नहीं। दूसरे चरण में आरोपों की सच्चाई और गुण-दोष पर विचार किया जाता है। दोनों चरणों में मिलाकर दो से तीन साल का समय लग सकता है। यानी फिलहाल अदालत हर्जाने की राशि पर विचार नहीं करेगी।
कंपनी की तैयारी
टाटा स्टील ने कहा है कि वह SFW द्वारा दिए गए दस्तावेजों का अध्ययन कर रही है और अधिवक्ताओं से सलाह ले रही है। साथ ही कंपनी दावों के संभावित असर का भी आंकलन कर रही है। उसका कहना है कि वह पर्यावरण को लेकर सजग है और अपने परिचालन में इसे प्राथमिकता देती है।