
Tata Trusts: टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से वेणु श्रीनिवासन को आजीवन ट्रस्टी के रूप में फिर से नियुक्त किया है। संगठन के भीतर कथित आंतरिक मतभेदों के बीच यह एक बड़ा फैसला लिया गया है। वेणुगोपाल की यह नियुक्ति उनके कार्यकाल खत्म होने के ठीक पहले हुई है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब टाटा ट्रस्ट्स के लोग आपस में बंटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि ग्रुप में दो गुट बन गए हैं। एक नोएल टाटा के साथ है, जिन्होंने रतन टाटा के निधन के बाद कमान संभाली थी। दूसरा गुट मेहल मिस्त्री के साथ है, जिनके शापूरजी पालोनजी परिवार से संबंध हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि श्रीनिवासन की फिर से यह नियुक्ति सर्वसम्मति से हुई है।
हालांकि, टाटा ट्रस्ट ने न्यूज एजेंसी के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया है। एक और ट्रस्टी मेहली मिस्त्री की फिर से नियुक्ति पर अगले कुछ दिनों में विचार किया जाना है। श्रीनिवासन की फिर से नियुक्ति अप्रत्याशित नहीं थी। इसकी वजह यह है कि टाटा का ट्रस्टों ने 17 अक्टूबर, 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें कहा गया था कि किसी भी ट्रस्टी का कार्यकाल समाप्त होने पर, उस ट्रस्टी को संबंधित ट्रस्ट द्वारा फिर से नियुक्त किया जाएगा। ऐसी नियुक्ति की अवधि पर कोई सीमा नहीं लगाई जाएगी।
अब ध्यान मिस्त्री की पुनर्नियुक्ति पर है, जिनका कार्यकाल 28 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। इस बात पर राय बंटी हुई है कि क्या उनका कार्यकाल अपने आप आगे बढ़ जाएगा या आजीवन कार्यकाल के लिए ट्रस्टियों की सर्वसम्मति से मंजूरी लेनी होगी। टाटा ट्रस्ट्स सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट सहित कई परोपकारी ट्रस्ट्स की निगरानी करने वाली इकाई है। ट्रस्ट टाटा सन्स में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। टाटा सन्स, 156 वर्ष पुराने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसमें लगभग 400 कंपनियां शामिल हैं, जिनमें से 30 लिस्टेड हैं।
17 अक्टूबर, 2024 की बैठक में यह फैसला लिया गया कि कोई भी ट्रस्टी जो किसी अन्य ट्रस्टी की फिर से नियुक्ति के खिलाफ वोट देता है, वह अपनी प्रतिबद्धता का उल्लंघन करेगा और ट्रस्ट्स के बोर्ड में सेवा करने के लिए अयोग्य होगा। इसका मतलब है कि SDTT और SRTT के सभी ट्रस्टी आजीवन सेवा करेंगे। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया था कि सभी ट्रस्टी समान रूप से जिम्मेदार हैं। इस प्रकार ट्रस्टी की नियुक्ति महज औपचारिकता बन गई है। जेआरडी टाटा, रतन टाटा, जमशेद भाभा और आरके कृष्ण कुमार आजीवन ट्रस्टी रहे।
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