Budget: 5 ऐतिहासिक बजट जिन्होंने भारत के आर्थिक परिदृश्य को दिया आकार, डिटेल में जानें सबकुछ

भारत का केंद्रीय बजट देश की आर्थिक दिशा तय करता है। 1957 का वेल्थ टैक्स, 1973 का ब्लैक बजट, 1986 का सुधारवादी बजट, 1991 का उदारीकरण बजट और 2025 में आयकर राहत जैसे ऐतिहासिक बजट ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत और विकासोन्मुख बनाया।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड27 Jan 2026, 10:21 AM IST
5 ऐतिहासिक बजट
5 ऐतिहासिक बजट

भारत का केंद्रीय बजट सिर्फ एक दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक तरक्की की रूपरेखा होता है। यह बजट भारत को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने में मदद करता है और नागरिकों, निवेशकों व कारोबारियों को सरकार की नीतियों की दिशा समझाता है, ताकि लंबे समय के फायदे हासिल किए जा सकें। केंद्रीय बजट 2026 में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और खर्च बढ़ाने से जुड़े कदमों पर खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

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आजाद भारत का पहला बजट आर.के. शणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था, जिसने भारत की वित्तीय नीति की नींव रखी। इसके बाद कई वित्त मंत्रियों ने ऐसे ऐतिहासिक बजट पेश किए, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ अहम बजट के बारे में:

वेल्थ टैक्स की शुरुआत (बजट 1957)

1957-58 का बजट तत्कालीन वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णमाचारी ने पेश किया। इसमें पहली बार वेल्थ टैक्स लागू किया गया। इसका उद्देश्य अमीर-गरीब के बीच की खाई कम करना और टैक्स दायरा बढ़ाना था। यह टैक्स 2015 तक लागू रहा, बाद में इसे खत्म कर दिया गया।

ब्लैक बजट (1973)

1973 का बजट यशवंतराव चव्हाण ने पेश किया, जिसे “ब्लैक बजट” कहा गया। उस समय भारत गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। देश में 550 करोड़ का बड़ा वित्तीय घाटा, बढ़ती तेल कीमतें और खाद्य संकट था।

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कैरट एंड स्टिक बजट (1986)

28 फरवरी 1986 को वी.पी. सिंह ने यह बजट पेश किया। इसे लाइसेंस राज खत्म करने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जाता है। इसमें टैक्स चोरी करने वालों पर सख्ती और ईमानदार करदाताओं को राहत दी गई, इसलिए इसे “कैरट एंड स्टिक” बजट कहा गया। इसी बजट में MODVAT लागू किया गया, जिससे टैक्स का बोझ कम हुआ।

मनमोहन सिंह का ऐतिहासिक बजट (1991)

1991 का बजट भारत के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण बजटों में से एक माना जाता है। इसे डॉ. मनमोहन सिंह ने उस समय पेश किया जब भारत विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा था। इस बजट से उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की शुरुआत हुई। उद्योगों को आज़ादी मिली, विदेशी निवेश आया और भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली।

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पी. चिदंबरम का ड्रीम बजट (1997)

1997 का बजट पी. चिदंबरम ने पेश किया, जिसे “ड्रीम बजट” कहा गया। इसमें टैक्स सिस्टम को सरल बनाया गया और आयकर व कॉरपोरेट टैक्स घटाए गए। इस बजट ने निवेश बढ़ाने और भारत को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

निर्मला सीतारमण का बजट 2025 और आयकर सुधार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कई रिकॉर्ड बना चुकी हैं, जैसे सबसे ज्यादा लगातार बजट पेश करना। लेकिन बजट 2025 खासतौर पर इसलिए याद रखा जाएगा क्योंकि इसने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी। नए टैक्स स्लैब लागू किए गए और नई टैक्स व्यवस्था में आयकर कम किया गया। अब 12 लाख तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता, और वेतनभोगियों के लिए यह सीमा 12.75 लाख हो गई क्योंकि स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 75,000 कर दिया गया। इससे लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आया और खपत बढ़ी।

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