US Anti-Dumping Duty: भारतीय चावल पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का ट्रंप ने दिया संकेत! कहीं उल्टा ना पड़ जाए ये दांव

US Anti-Dumping Duty: अमेरिका ने भारतीय चावल पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी के संकेत दिए हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार इससे भारत के बासमती एक्सपोर्ट पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ऐसे कदम ट्रेड वार्ता के बीच गलत संदेश दे सकते हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड10 Dec 2025, 12:12 PM IST
भारतीय चावल पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी, ट्रंप का ये दांव कहीं उल्टा ना पड़ जाए
भारतीय चावल पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी, ट्रंप का ये दांव कहीं उल्टा ना पड़ जाए

US Anti-Dumping Duty: दिल्ली में भारत-अमेरिका ट्रेड डील फाइनल होने की तैयारी चल रही थी कि अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चावल पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का संकेत देकर माहौल थोड़ा टेंशन वाला कर दिया है। ट्रंप ने अमेरिकी किसानों की शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि भारत और कुछ दूसरे देश अमेरिका में 'सस्ता चावल' डंप कर रहे हैं। उन्होंने साफ-साफ तो कुछ नहीं कहा, लेकिन संकेत ऐसे दिए कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका फिर से नया टैरिफ लगा सकता है। अब सवाल ये है कि अगर ये ड्यूटी लग भी जाती है तो भारत पर कितना असर पड़ेगा?

ट्रंप की शिकायत, किसान लॉबी का दबाव

व्हाइट हाउस में ट्रंप ने कहा कि वो “इस मामले को देखेंगे,” जिससे साफ है कि अमेरिकी किसान लॉबी का दबाव बढ़ रहा है। फिलहाल भारतीय चावल पर अमेरिका में लगभग 50% तक ड्यूटी लगती है, इसके बावजूद बासमती की डिमांड कम नहीं हुई है। रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवार और बासमती पसंद करने वाले उपभोक्ता इसे खरीदते ही हैं। इसी वजह से एक्सपोर्ट वॉल्यूम कम होने के बावजूद भारतीय चावल का बाजार बना हुआ है।

अगर नई ड्यूटी लगे तो कितना असर पड़ेगा?

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, FY2025 में भारत ने अमेरिका को करीब 392 मिलियन डॉलर का चावल एक्सपोर्ट किया, जो भारत के कुल चावल निर्यात का सिर्फ 3% है। इनमें लगभग 86% बासमती चावल है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर नई ड्यूटी लग भी जाती है, तो इसका ज्यादा असर भारतीय निर्यातकों पर नहीं बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। वजह ये कि बासमती का विकल्प अमेरिका में लगभग सिर्फ पाकिस्तान है और उसकी सप्लाई भी सीमित है।

“डंपिंग” वाली दलील सही है भी या नहीं

इकॉनॉमिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि “डंपिंग” तब माना जाता है जब कोई देश किसी प्रोडक्ट को उसकी लागत से कम दाम पर बेचता हो। भारत में किसानों को सब्सिडी मिलती है, जिससे पैदावार सस्ती पड़ती है, यानी कीमत कम होने का मतलब ये नहीं कि डंपिंग हो रही है। इसके अलावा ज्यादातर भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रीमियम बासमती बेचती हैं, ना कि बचा हुआ स्टॉक।

चावल नहीं तो फिर किसे लगेगा असली झटका?

ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस वक्त अमेरिका की टीम भारत में मौजूद है और ज्यादातर मसले लगभग सुलझ चुके थे। ऐसे में इस तरह के बयान सिर्फ बातचीत का टोन खराब करते हैं। ये भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों में भरोसा कम करते हैं और दोनों देशों के बीच के माहौल पर एक तरह का राजनीतिक दबाव डालते हैं। ट्रंप का यह 'एंटी-डंपिंग' जैसा बयान बातचीत को और कठिन कर सकता है, भले नुकसान एक्सपोर्ट का कम ही हो।

पहले भी बढ़ चुके हैं टैरिफ वाले मतभेद

बीते महीनों में अमेरिका ने कुछ प्रोडक्ट्स पर 25% से ज्यादा घरेलू टैरिफ भी लगाए और कहा गया कि इसकी वजह रूस से भारत की खरीद है। अब देखना ये है कि इस हफ्ते की बातचीत में दोनों देशों के बीच कोई नरमी दिखती है या फिर तनाव बढ़ता है।

अगर अमेरिका एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा भी दे, तो भारत की बासमती एक्सपोर्ट पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसका सबसे खराब पहलू ये होगा कि दुनिया को गलत संदेश जाएगा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड विश्वास अभी भी कमजोर है।

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