अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर भारतीय निर्यात पर नहीं दिखाई दे रहा है। इस बात की जानकारी वाणिज्य मंत्रालय ने संसदीय समिति को दी है। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने इस मामले की स्थाई संसदीय समिति को दी गई जानकारी के मुताबिक इस साल अप्रैल-अक्टूबर के बीच पिछले साल के मुकाबले अमेरिकी डिमांड में बढ़ोतरी देखी जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी अमेरिकी टैरिफ का कोई नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला है।
अमेरिका में भारतीय उत्पाद की बढ़ी डिमांड
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका की तरफ से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ के बावजूद अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया है।
GDP पर टैरिफ का कोई असर नहीं
भारत पर अमेरिकी टैरिफ के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था पर भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI की तरफ से जारी की गई एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि अमेरिकी टैरिफ का भारतीय GDP पर लगभग कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। इसके विपरीत, भारत के कुल निर्यात में मजबूती बनी रही और उसमें साल-दर-साल बढ़ोती देख जा रही है।
अमेरिका को निर्यात में भी सुधार
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने वाणिज्य मंत्रालय की स्थाई संसदीय समिति को बताया कि पिछले साल की समान अवधि यानी अप्रैल-अक्टूबर 2024 की तुलना में इस साल उसी अवधि में यानी साल 2025 में अमेरिका को भारतीय निर्यात में सुधार देखा गया है। मतलब भारतीय सामान की डिमांड अमेरिका में पिछले साल के मुकाबले इस साल बढ़ गई है।
किन-किन क्षेत्रों को हुआ फायदा
इस साल पिछले साल के मुकाबले भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले कुछ चुनिंदा क्षेत्रों के सामानों की डिमांड में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पादों की लगातार अच्छी मांग के कारण अमेरिका को होने वाले निर्यात में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
मजबूत घरेलू बाजार पर टिकी GDP
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ का भारतीय GDP पर असर नहीं पड़ने की एक बड़ी वजह भारतीय सामान की गुणवत्ता है। वहीं GDP पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ने की बड़ी वजह दुनिया का सबसे बड़ा हमारा अपना घरेलू बाजार है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि भारतीय बाजार का आकार भारत के निर्यात बाजार से कहीं बड़ा है और घरेलू उपभोग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।
निर्यात नीति में बदलाव ने संभाली स्थिति
वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ लगाने की जब चर्चा शुरू हुई थी उससे पहले ही भारत सरकार ने अमेरिका का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया था। सरकार ने ब्रिटेन, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका समेत नए-नए बाजारों तक भारतीय प्रोडक्ट की सप्लाई के लिए रास्ता निकाला। यही वजह है कि टैरिफ के असर को मात देने में मदद मिली, वहीं घरेलू बाजार में भी खपत बढ़ाई गई।
हालांकि, ये भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कुछ श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल, रत्न, आभूषण और चमड़े के सामानों पर टैरिफ का असर पड़ा है। जिससे इन क्षेत्रों के निर्यातकों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर, भारतीय निर्यात बाजार लचीला बना हुआ है।