तंबाकू-पान मसाला खाने वालों की जेब पर बढ़ेगा भार, लोकसभा में केंद्र सरकार ने पेश किए दो नए बिल

सरकार ने नए विधेयकों के जरिए तंबाकू और पान मसाला पर कर प्रणाली को स्थिर रखने का प्रयास किया है। विपक्ष ने स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है, लेकिन विधेयक पेश किए गए।

Manali Rastogi( विद इनपुट्स फ्रॉम Bhasha)
पब्लिश्ड1 Dec 2025, 02:16 PM IST
तंबाकू-पान मसाला खाने वालों की जेब पर बढ़ेगा भार, लोकसभा में केंद्र सरकार ने पेश किए दो नए बिल
तंबाकू-पान मसाला खाने वालों की जेब पर बढ़ेगा भार, लोकसभा में केंद्र सरकार ने पेश किए दो नए बिल

नई दिल्ली: सरकार ने सोमवार को लोकसभा में दो नए विधेयक पेश किए। इनका मकसद यह है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर खत्म होने के बाद भी तंबाकू, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों पर कुल कर भार पहले जैसा ही बना रहे।

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इन विधेयकों के जरिए पुराने जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की जगह नया उपकर (सेस) लगाया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह विधेयक विपक्ष के शोर-शराबे के बीच पेश किए।

लोकसभा में विपक्षी दल एसआईआर (मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण) और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे थे, इसलिए भारी हंगामा हो रहा था। तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय और द्रमुक के सांसद कथिर आनंद ने इन विधेयकों का विरोध किया।

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सौगत रॉय का कहना था कि विधेयकों में तंबाकू पर उत्पाद शुल्क लगाने की बात तो है, लेकिन तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कथिर आनंद ने कहा कि इससे जनता पर टैक्स का और बोझ बढ़ेगा।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक, 2025 के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर नया उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। यह शुल्क पहले लग रहे जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा।

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"स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025" पान मसाला पर लगने वाले क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त धन जुटाना है। इस उपकर को उन मशीनों और प्रक्रियाओं पर लागू किया जाएगा, जिनसे पान मसाला और इसी तरह की चीजें बनाई जाती हैं।

फिलहाल तंबाकू और पान मसाला पर 28% जीएसटी लगता है, और इसके ऊपर अलग-अलग दरों पर क्षतिपूर्ति उपकर भी लगाया जाता है।

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