
UK Smoking Ban: तंबाकू-सिगरेट सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। इसके प्रति समय - समय में भारत समेत दुनिया के कई देशों में जागरूकता फैलाई जाती है। इस बीच ब्रिटेन ने धूम्रपान को रोकने के लिए सख्त कदम उठाया है। अब वहां नई पीढ़ी के लोगों के लिए सिगरेट खरीदना हमेशा के लिए बंद करने की तैयारी हो गई है। सरकार ने ‘टोबैको एंड वेप्स बिल’ पास कर दिया है। इसके तहत 2008 के बाद पैदा हुए लोग जिंदगी भर तंबाकू से जुड़ी चीजें नहीं खरीद पाएंगे।
संसद से बिल पास हो चुका है और अब सिर्फ किंग चार्ल्स III की औपचारिक मंजूरी बाकी है, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा। यह पूरे ब्रिटेन यानी इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में लागू होगा। सरकार ने यह बिल 2024 में पेश किया था। इसे अपनी बड़ी प्राथमिकताओं में रखा था। नए नियम के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से यह कानून लागू होगा।
UK संसद से पास हुआ तंबाकू और वेप्स बिल सिर्फ सिगरेट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वेपिंग (ई-सिगरेट) और निकोटीन प्रोडक्ट्स पर भी सख्त नियम लागू किए जाएंगे। सरकार को इनके फ्लेवर, पैकेजिंग और बिक्री को कंट्रोल करने की नई शक्तियां मिलेंगी। इसका सीधा मकसद है, युवाओं को शुरुआत से ही इन आदतों से दूर रखना। क्योंकि रिसर्च बताती है कि ज्यादातर लोग धूम्रपान की शुरुआत किशोरावस्था में ही करते हैं।
वेपिंग (ई-सिगरेट) पर भी सख्ती की गई है। स्कूल, अस्पताल और बच्चों के खेलने की जगहों पर स्मोकिंग पूरी तरह बंद होगी। कई इनडोर जगहों पर वेपिंग भी नहीं कर सकेंगे। अगर कोई 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति के साथ कार में वेपिंग करता है, तो वह भी गैरकानूनी होगा। ब्रिटेन के हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग ने कहा है कि यह पीढ़ी लत और नुकसान से बची हुई पहली स्मोक-फ्री जनरेशन होगी। उनका कहना है कि इलाज करने से बेहतर है पहले ही बीमारी को रोक दिया जाए।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन में धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या में 1970 के दशक से दो-तिहाई कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, देश की 13 फीसदी आबादी यानी लगभग 64 लाख लोग सिगरेट और तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं। यह कानून मंत्रियों को तंबाकू, वेपिंग और निकोटीन उत्पादों को और भी सख्ती से नियंत्रित करने के लिए ज्यादा अधिकार देता है। इसमें इन उत्पादों के स्वाद और पैकेजिंग को नियंत्रित करने की शक्तियाँ भी शामिल हैं। ये ऐसे उपाय हैं जिन्हें इन उत्पादों को कम आकर्षक बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, खासकर युवाओं के लिए।
इस मामले में देखा जाए तो सबसे बड़ी बात यह है कि यह कानून सिर्फ एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धीरे-धीरे पूरे तंबाकू बाजार को खत्म करने की दिशा में कदम है। इसके बाद अब तंबाकू कंपनियों को अपना बिजनेस मॉडल बदलना पड़ेगा। साथ ही नए बाजार तलाशने की जरूरत पड़ेगी। इन्वेस्टर्स का भरोसा कमजोर हो सकता है।
यूके सरकार को साल 2024-25 में लगभग £8.8 अरब (लगभग ₹95,000 करोड़) की कमाई की है। वहीं साल 2025-26 में यह घटकर £8 बिलियन (लगभग ₹80,000–85,000) करोड़ रहने का अनुमान है। अगर वहीं नई पीढ़ी पर बैन लागू होता है तो यह कमाई धीरे-धीरे करके खत्म हो सकती है।
भारत जैसे देशों में भी स्मोकिंग और वेपिंग तेजी से बढ़ रही है। युवाओं स्मोकिंग का चलन सबसे ज्यादा है। UK का यह मॉडल एक संकेत देता है कि अगर सख्त नियम और जागरूकता साथ-साथ चलें, तो बड़ी हेल्थ समस्याओं को रोका जा सकता है।
भारत में धूम्रपान पूरी तरह बैन नहीं है, लेकिन इसे कंट्रोल करने के लिए सख्त कानून मौजूद हैं। COTPA Act 2003 (Cigarettes and Other Tobacco Products Act) के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू बेचना गैरकानूनी है। स्कूल/कॉलेज के 100 मीटर के अंदर तंबाकू की बिक्री प्रतिबंधित है। सार्वजनिक जगहों (जैसे ऑफिस, मॉल, बस स्टैंड) पर स्मोकिंग बैन है। सिगरेट के पैकेट पर 85% तक हेल्थ वार्निंग अनिवार्य है।
न्यूजीलैंड पहला देश था जिसने यह आइडिया दिया कि एक तय साल के बाद पैदा हुए लोग कभी सिगरेट नहीं खरीद पाएंगे। न्यूजीलैंड सरकार देश को सिगरेट-तम्बाकू से मुक्त करना चाहती थी इसलिए यह कानून बनाया गया था। दिसंबर 2022 में न्यूजीलैंड संसद में तम्बाकू-सिगरेट को बैन करने वाला स्मोक फ्री एनवायरनमेंट कानून पास हो गया था। इसके तहत ऐसे लोग जिनका जन्म 2008 के बाद हुआ है, वो किसी भी तरह के स्मोकिंग प्रोडक्ट्स नहीं खरीद सकते थे। बाद में 2024 में सरकार बदलने पर यह कानून वापस ले लिया गया। सरकार ने तर्क दिया कि इससे टैक्स कटौती के लिए राजस्व जुटाने में मदद मिलेगी।
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