
अमेरिका ने भारत के खिलाफ लगे 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और फिर डील की घोषणा कर दी। इस बीच अमेरिका की एक बड़ी शख्सियत ने दावा किया है कि भारतीय सामानों पर अमेरिका में टैरिफ रेट और घटेगा।
अमेरिका ने चीन पर 37 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, पाकिस्तान समेत दक्षिण एशिया के अन्य ज्यादातर देशों पर 19 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया और जापान पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि भारत को अपने सभी पड़ोसी और प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अमेरिकी टैरिफ में ज्यादा छूट मिली है।
बड़ी बात ये है कि टैरिफ पर भारत को अमेरिका से आगे भी खुशखबरी मिल सकती है। कम से कम भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ जस्टर को तो यही लगता है। उन्होंने ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में कहा कि अमेरिका-भारत के बीच हुई ट्रेड डील दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बहुत अच्छी खबर है। जस्टर ने कहा, 'यह तो समझौते का पहला चरण ही है। अगर दोनों देश इस पर काम जारी रखते हैं तो आगे जाकर हमें (टैरिफ) रेट में आगे और भी कटौती देखने को मिल सकती है।'
रिक रॉसो सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में भारत और इमर्जिंग एशिया इकोनॉमिक्स के सीनियर एडवाइजर और चेयर हैं। उन्होंने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा, 'व्यापार समझौते की बारीकियां अभी सामने नहीं आई हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर दिए गए संकेतों के अनुसार दोनों देश टैरिफ घटाते हैं तो वास्तविक वाणिज्यिक अवसरों का द्वार खुल सकता है।'
अमेरिका से टैरिफ पर मिली राहत के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव खत्म होने का अनुमान है। यह भारत के लिए इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह चीन के विकल्प के तौर पर दुनिया के मैन्युफैक्चरिंग हब का रूप लेना चाहता है।
अनुमानों के मुताबिक, अमेरिका के साथ ट्रेड डील से भारत की अर्थव्यवस्था में इस वर्ष 0.2 से 0.3 प्रतिशत तक की उछाल आ सकती है। भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि वित्त वर्ष 2026-17 में भारत की जीडीपी 7.4 प्रतिशत की दर की गति प्राप्त कर सकती है जिसे भारत सरकार ने 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत तक आंक रखा है।
भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने ब्लूमबर्ग टीवी से कहा कि निर्यातकों को भारत की तरफ आकर्षित करने का चीन प्लस वन प्रोसेस टैरिफ को लेकर अनिश्चितताओं से थोड़ा बाधित हो गया था। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के साथ टैरिफ डील से अब वह प्रोसेस फिर से पटरी पर आ जाएगा।'
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले वर्ष 2 अप्रैल को दुनिया भर के कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। इस लिस्ट में 25 प्रतिशत टैरिफ के साथ भारत भी शामिल था। फिर अगस्त महीने में अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ यह कहकर लगा दिया था कि भारत, रूस से तेल खरीदकर उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में मदद कर रहा है।
हालांकि, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत मूलतः निर्यात आधारित नहीं है, लेकिन अमेरिका उसका सबसे बड़ा बाजार है। भारत से दुनिया में होने वाले निर्यात का 20 प्रतिशत अकेले अमेरिका जाता है। भारत के कपड़ा, चमड़ा, जूते-चप्पल और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्र अमेरिकी टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
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