
Vipul Organics Result: मध्यपूर्व संघर्ष से बाधित शिपिंग लेन, निर्यात में देरी; इन सब चुनौतियों के बावजूद विपुल ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (Vipul Organics Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 को अपने इतिहास का सबसे मजबूत साल बना दिया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध इस स्पेशलिटी केमिकल्स कंपनी ने सोमवार को अपने वार्षिक नतीजे पेश किए और शेयरधारकों को 8% डिविडेंड यानी 10 रुपये अंकित मूल्य पर 80 पैसे प्रति शेयर देने की सिफारिश की। यह डिविडेंड 54वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद दिया जाएगा।
FY26 में कंपनी का कुल राजस्व (Total Revenue) स्टैंडअलोन आधार पर 17,539.57 लाख करोड़ रुपये रहा जो FY25 के 16,280.01 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 7.74% की बढ़त। लेकिन असली कहानी मुनाफे की है। टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) 50.24% उछलकर 954.92 लाख रुपये पहुंचा, जबकि टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) 55.63% की जोरदार बढ़त के साथ 691.96 लाख रुपये हो गया। प्रति शेयर आय (EPS) भी FY25 के 2.71 रुपये से बढ़कर 3.84 रुपये हो गई जो 41.70% की छलांग है।
सालभर की तस्वीर तो अच्छी रही, लेकिन मार्च 2026 को खत्म हुई चौथी तिमाही (Q4 FY26) ने तो रिकॉर्ड ही बना दिया। इस तिमाही में रेवेन्यू साल-दर-साल 19.67% बढ़कर 5,262.38 लाख रुपये हुआ। पीबीटी में 155.60% का उछाल आया और Q4 FY25 के 117.62 लाख रुपये से बढ़कर 300.65 लाख रुपये पहुंच गया। PAT भी 148.59% उछलकर 197.23 लाख रुपये हो गया। तिमाही आधार पर भी कंपनी ने अच्छी प्रगति दर्ज की। इसने Q3 FY26 की तुलना में रेवेन्यू 13.47% और PBT 19.21% बढ़ा।
कंपनी के प्रबंध निदेशक विपुल पी. शाह ने कहा कि मध्यपूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक शिपिंग मार्गों में बाधाएं आईं और कुछ निर्यात खेप में देरी हुई, इसके बावजूद यह कंपनी का अब तक का सबसे मजबूत वित्तीय प्रदर्शन रहा। उन्होंने यह भी कहा कि लागत अनुकूलन (Cost Optimisation) की पहल का असर दिखना जारी है और देश में कंपनी का संचालन मजबूत बना रहा।
FY27 के लिए कंपनी की नजर सायखा, गुजरात में बन रहे ग्रीनफील्ड प्लांट पर है। यह प्लांट न सिर्फ पिग्मेंट्स में क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि कंपनी अपनी अनुषंगी इकाई AdiMem Technologies के जरिए जल-शोधन मेम्ब्रेन (Water Purification Membranes) के बाजार में भी कदम रख चुकी है। AdiMem को भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी मेम्ब्रेन निर्माता बताया जा रहा है, और कंपनी का लक्ष्य है कि तीन साल में मेम्ब्रेन से कुल राजस्व का 25% हिस्सा आए। भारत का मेम्ब्रेन सेपरेशन टेक्नोलॉजी बाजार 2026 के 1.34 अरब डॉलर से बढ़कर 2033 तक 2.7 अरब डॉलर हो सकता है। कंपनी के मुताबिक, यह कदम चीन पर निर्भरता कम करने और वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बनाने की दिशा में अहम है।
विपुल ऑर्गेनिक्स के लिए FY26 सिर्फ अच्छे नतीजों का साल नहीं रहा। यह एक बदलाव की शुरुआत भी है। पिग्मेंट्स और डाईज के पारंपरिक कारोबार में मुनाफे की ऊंची उड़ान के साथ-साथ मेम्ब्रेन टेक्नोलॉजी में प्रवेश से कंपनी अपना कारोबारी आधार विस्तृत कर रही है। शेयरधारकों को डिविडेंड देने की सिफारिश इसी भरोसे की अभिव्यक्ति है।
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